Ganeshotsav 2026: घर में बप्पा की स्थापना से पहले जान लें दिशा, मूर्ति और विसर्जन से जुड़े जरूरी वास्तु नियम

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेशोत्सव की शुरुआत होती है। साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ उत्सव का समापन होगा। इस दौरान भक्त भगवान गणेश को घर में विधि-विधान और श्रद्धा के साथ विराजमान करते हैं। मान्यता है कि गणपति बुद्धि, सुख-समृद्धि देने के साथ घर के सभी विघ्न दूर करते हैं।

ईशान कोण में स्थापना मानी जाती है शुभ

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष मानी जाती है। अगर ईशान कोण में जगह उपलब्ध नहीं है तो उत्तर या पश्चिम दिशा में भी गणपति की स्थापना की जा सकती है। स्थापना के लिए ऐसी जगह चुनें, जहां साफ-सफाई और पूजा करना आसानी से संभव हो।

गणपति का मुख घर के अंदर रखें

गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते समय उनके मुख की दिशा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए, ताकि उनकी नजर घर के सदस्यों पर रहे। वहीं उनकी पीठ दीवार की ओर होनी चाहिए। मान्यता है कि गणेश जी की पीठ की ओर दरिद्रता का वास होता है, जबकि उनके सम्मुख भाग को सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसलिए मूर्ति की पीठ खुले हिस्से या मुख्य कमरे की ओर न रखें।

जमीन पर सीधे न रखें गणेश जी की मूर्ति

गणपति की स्थापना के लिए साफ और पवित्र स्थान का चुनाव करें। मूर्ति को सीधे फर्श पर रखने के बजाय साफ चौकी या पाटे पर स्थापित करना शुभ माना जाता है। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर प्रतिमा रखें। स्थापना स्थल के आसपास गंदगी, जूते-चप्पल या ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए, जो पूजा की पवित्रता को प्रभावित करें।

मिट्टी की प्रतिमा को दी जाती है प्राथमिकता

गणेशोत्सव के लिए घर में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा लाने की परंपरा काफी प्रचलित है। ऐसी प्रतिमा पूजा के बाद विसर्जन के लिए भी सुविधाजनक रहती है। गणपति स्थापना के समय उन्हें दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ उनका आह्वान कर विधि-विधान से पूजा करें। प्रतिमा चुनते समय अपनी आस्था और पूजा की सुविधा का भी ध्यान रखना चाहिए।

रोज करें पूजा, आरती और भोग अर्पित

गणपति के घर में विराजमान रहने तक पूजा स्थल की पवित्रता और साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी माना जाता है। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद गणपति की पूजा करें और शाम को आरती करें। भगवान को नियमित रूप से मोदक, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित किया जा सकता है। गणेशोत्सव के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धा के साथ गणपति विसर्जन करें और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें।

The Hindi Post
Author: The Hindi Post