Healthy Diet: आयोडीन की कमी को हल्के में न लें, थायरॉइड से बच्चों के दिमागी विकास तक पड़ सकता है असर, रोज की थाली में जरूर शामिल करें ये चीजें

आयोडीन शरीर के लिए जरूरी खनिजों में शामिल है। इसकी जरूरत कम मात्रा में होती है, लेकिन शरीर के लिए इसकी भूमिका बेहद अहम है। आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने में मदद करता है, जो मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और सामान्य विकास को नियंत्रित करते हैं। बच्चों के दिमागी विकास और सीखने की क्षमता के लिए भी पर्याप्त आयोडीन जरूरी माना जाता है। गर्भावस्था में इसकी जरूरत और बढ़ जाती है।

कमी होने पर शरीर में दिख सकते हैं ये संकेत

लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने पर थायरॉइड ग्रंथि बढ़ सकती है, जिसे घेंघा कहा जाता है। थायरॉइड हार्मोन कम होने पर थकान, वजन बढ़ना और ठंड ज्यादा लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में इसकी कमी विकास और मानसिक क्षमता को प्रभावित कर सकती है। एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं। गर्भावस्था में इसकी कमी भ्रूण के विकास के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

आयोडीन पाने का सबसे आसान तरीका

आयोडीन की कमी से बचने का सबसे आसान तरीका आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है। खाना बनाते समय सामान्य नमक की जगह आयोडीन वाला नमक चुनना शरीर की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। हालांकि नमक ज्यादा खाना सही नहीं है। इसलिए आयोडीन पाने के लिए नमक की मात्रा बढ़ाने के बजाय सही प्रकार का नमक इस्तेमाल करना बेहतर तरीका है।

दूध, अंडे और समुद्री भोजन भी विकल्प

आयोडीन के लिए समुद्री खाद्य पदार्थ अच्छे स्रोत माने जाते हैं। समुद्री शैवाल में इसकी मात्रा काफी अधिक हो सकती है, जबकि मछली और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों से भी आयोडीन मिल सकता है। दूध, दही और चीज जैसे डेयरी उत्पाद भी उपयोगी स्रोत हैं। अंडे में आयोडीन के साथ प्रोटीन भी मिलता है। आलू में भी कुछ मात्रा में आयोडीन पाया जाता है, इसलिए अलग-अलग खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार में शामिल करना बेहतर है।

आयोडीन वाले नमक को ऐसे रखें सुरक्षित

आयोडीन युक्त नमक को सही तरीके से रखना भी जरूरी है। नमी, गर्मी और लंबे समय तक रोशनी के संपर्क में रहने से इसमें मौजूद आयोडीन कम हो सकता है। इसलिए नमक को खुले बर्तन में रखने के बजाय सूखे और अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखें। खाना बनाते समय नमक को बहुत पहले डालने के बजाय खाना लगभग तैयार होने पर डालना भी आयोडीन को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

कुछ खाद्य पदार्थों में बरतें थोड़ी सावधानी

पत्तागोभी, फूलगोभी और सोयाबीन जैसी चीजों को गोइट्रोजेनिक खाद्य पदार्थ कहा जाता है। ये थायरॉइड की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। सामान्य तौर पर संतुलित मात्रा में इन्हें आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति में आयोडीन की कमी या थायरॉइड की समस्या है, तो डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।

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Author: The Hindi Post