ISRO का ‘नॉटी बॉय’ बना बाज़ीगर, 35,786 किमी ऊपर पहुंची भारत की नई आंख, अब पड़ोसी देशों पर भी रहेगी नजर

भारत की नई सैटेलाइट EOS-05 के साथ ‘नॉटी बॉय’ नाम खूब चर्चा में है। लेकिन यह सैटेलाइट का नाम नहीं, बल्कि उस रॉकेट का मजेदार नाम है जो इसे अंतरिक्ष तक लेकर गया। पहले इस रॉकेट की कुछ उड़ानों में दिक्कतें आई थीं और वह तय रास्ते से भटक गया था। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इसे ‘नॉटी बॉय’ कहना शुरू किया। इस बार रॉकेट ने बिल्कुल सही तरीके से काम किया और सैटेलाइट को तय कक्षा तक पहुंचा दिया।

EOS-05 क्या खास काम करेगी?

EOS-05 यानी Earth Observation Satellite-05 धरती पर लगातार नजर रखने वाली सैटेलाइट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका जियोस्टेशनरी कक्षा में रहना है। आसान भाषा में समझें तो यह पृथ्वी के साथ उसी गति से घूमेगी, इसलिए धरती से देखने पर एक ही बड़े इलाके के ऊपर स्थिर दिखाई देगी। यानी इसे अंतरिक्ष में लगे एक लगातार काम करने वाले कैमरे की तरह समझ सकते हैं।

35,786 किलोमीटर की ऊंचाई का कमाल

जियोस्टेशनरी सैटेलाइट को पृथ्वी से करीब 35,786 किलोमीटर की खास ऊंचाई पर स्थापित किया जाता है। यहां सैटेलाइट लगभग 24 घंटे में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करती है, जबकि पृथ्वी भी अपनी धुरी पर करीब 24 घंटे में घूमती है। दोनों की गति का यह तालमेल सैटेलाइट को एक ही इलाके के ऊपर बनाए रखता है। यही वजह है कि EOS-05 बार-बार उसी क्षेत्र की तस्वीरें और जानकारी दे सकती है।

बाढ़, तूफान और जंगल की आग पर नजर

इस तकनीक का बड़ा फायदा आपदा प्रबंधन में होगा। बाढ़ का पानी कहां फैल रहा है, चक्रवात किस दिशा में बढ़ रहा है या जंगल में आग कहां लगी है, इसकी निगरानी लगातार की जा सकती है। सामान्य घूमने वाली सैटेलाइट को किसी इलाके की तस्वीर लेने के लिए दोबारा वहां पहुंचने का इंतजार करना पड़ सकता है। जियोस्टेशनरी सैटेलाइट में यह इंतजार काफी कम हो जाता है।

HyperSpectral कैमरा बनाएगा इसे और खास

EOS-05 में हाइपरस्पेक्ट्रल कैमरा जैसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह केवल सामान्य तस्वीर नहीं लेता, बल्कि अलग-अलग वस्तुओं और सतहों से मिलने वाले प्रकाश के संकेतों के आधार पर उनके बारे में जानकारी जुटा सकता है। इससे फसल की स्थिति, मिट्टी और पानी में बदलाव जैसी चीजों की पहचान में मदद मिल सकती है। हालांकि इतनी ज्यादा ऊंचाई होने के कारण यह छोटी वस्तुओं की बेहद बारीक तस्वीर लेने के लिए नहीं बनी है।

भारत की अंतरिक्ष निगरानी क्षमता को बड़ा फायदा

EOS-05 का असली महत्व लगातार निगरानी और तेजी से जानकारी देने की क्षमता में है। मौसम, समुद्र, कृषि, बाढ़, जंगल और बड़े भौगोलिक क्षेत्रों की निगरानी में इससे मदद मिल सकती है। सीमावर्ती इलाकों पर नजर रखने में भी ऐसी तकनीक उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसे हर छोटी वस्तु या छिपे हुए सैन्य उपकरण को निश्चित रूप से पहचान लेने वाला कैमरा समझना सही नहीं होगा। ‘नॉटी बॉय’ की इस सफल उड़ान ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता में जरूर एक अहम उपलब्धि जोड़ी है।

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Author: The Hindi Post