भारतीय खानपान की पहचान कभी रोटी, चावल, दाल, सब्जी, दही और घर के बने खाने से होती थी। लेकिन अब हमारी प्लेट में काफी बदलाव नजर आता है। मोटे अनाज और दाल-सब्जियों की जगह रिफाइंड अनाज, सफेद चावल, मैदा और पैकेज्ड फूड की मौजूदगी बढ़ी है। नाश्ते में ब्रेड और दिन के दूसरे भोजन में फ्रोजन या प्रोसेस्ड फूड खाना कई लोगों की आदत बन गया है।
रिफाइंड अनाज से क्यों बढ़ी चिंता
खाने में बदलाव सिर्फ हमारी रसोई तक सीमित नहीं है। खेती, अनाज की प्रोसेसिंग और बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों ने भी हमारी थाली को प्रभावित किया है। अनाज को ज्यादा प्रोसेस और रिफाइन करने से उसका कुछ फाइबर और पोषण कम हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सिर्फ कार्बोहाइड्रेट की मात्रा नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की सलाह देते हैं।
हर रोटी और चावल को दोष देना सही नहीं
रोटी और चावल भारतीय भोजन का अहम हिस्सा हैं और इन्हें पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। समस्या तब बढ़ती है जब प्लेट का बड़ा हिस्सा सिर्फ रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से भर जाए और दाल, सब्जियां, प्रोटीन व फाइबर कम हो जाएं। आटे में मैदा का इस्तेमाल होने पर फाइबर घट सकता है, लेकिन हर आटे को मिलावटी या मैदा मिला हुआ मानना सही नहीं है।
मिलावट से ज्यादा जरूरी खाने की गुणवत्ता
अनाज और आटे की खराब गुणवत्ता या मिलावट पोषण और फूड सेफ्टी दोनों के लिहाज से चिंता की बात हो सकती है। हालांकि, हर खुले या पैकेज्ड प्रोडक्ट को मिलावटी समझना भी ठीक नहीं है। भरोसेमंद जगह से आटा और अनाज खरीदें। पैकेज्ड फूड लेते समय लेबल जरूर पढ़ें और रोजाना एक ही तरह के अनाज पर निर्भर रहने के बजाय डाइट में विविधता रखें।
थाली के साथ हमारी लाइफस्टाइल भी बदली
आज खाने की आदतों के साथ हमारी शारीरिक गतिविधियां भी कम हुई हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, ज्यादा स्क्रीन टाइम और वाहन पर बढ़ती निर्भरता के कारण रोजाना चलना-फिरना घटा है। अगर शरीर की जरूरत से ज्यादा कैलोरी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट लगातार डाइट में शामिल हों, तो वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
कैसी होनी चाहिए आपकी रोज की प्लेट
स्वस्थ थाली का मतलब रोटी या चावल छोड़ना नहीं, बल्कि सही संतुलन बनाना है। खाने में साबुत या कम प्रोसेस्ड अनाज, दालें, सब्जियां, फल, पर्याप्त प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल करें। जंक और पैकेज्ड फूड की मात्रा सीमित रखें। साथ ही रोजाना चलना-फिरना और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाना भी जरूरी है। आखिर स्वस्थ शरीर के लिए सिर्फ थाली नहीं, पूरी लाइफस्टाइल मायने रखती है।