Delhi की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47 लाख नाम गायब, क्या इतने वोट सच में कट गए? जानिए SIR की पूरी कहानी और बड़ा सवाल

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। 31 अगस्त को जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में 47,56,722 वोटरों के नाम शामिल नहीं हैं। दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स हैं, जबकि ड्राफ्ट रोल में 97,53,577 नाम शामिल किए गए हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 47 लाख वोट हमेशा के लिए कट गए हैं।

नाम छूटने वालों को मिलेगा दावा करने का मौका

जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। संबंधित दस्तावेजों और जानकारी की जांच के बाद सही पाए जाने वाले नाम अंतिम वोटर लिस्ट में जोड़े जा सकते हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक अंतिम SIR लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जानी है। इसलिए अभी ड्राफ्ट सूची को अंतिम सूची मानना सही नहीं होगा।

करीब 67 फीसदी वोटरों का हुआ सत्यापन

SIR के दौरान दिल्ली में करीब डेढ़ महीने तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया गया। कुल 1,45,10,299 रजिस्टर्ड वोटर्स में से 67.2 फीसदी के एन्यूमरेशन फॉर्म जमा और डिजिटाइज हुए। वहीं करीब 32.8 फीसदी यानी 47.56 लाख से ज्यादा मतदाता ASDDO श्रेणी में रखे गए। इसमें Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

20 फीसदी मतदाता पते पर नहीं मिले

सत्यापन के दौरान करीब 20 फीसदी मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO ने घर-घर जाकर फॉर्म बांटे और जानकारी जुटाई। कुछ लोग दिल्ली के अंदर ही दूसरी जगह चले गए थे, जबकि कुछ दिल्ली से बाहर जा चुके हैं। इसके अलावा मृत मतदाता, डुप्लीकेट एंट्री और अन्य मामलों को भी इस श्रेणी में रखा गया है।

47 लाख नाम स्थायी रूप से नहीं कटे

सबसे अहम बात यह है कि 47,56,722 नामों को स्थायी रूप से डिलीट नहीं माना जा सकता। अभी यह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है। जिन लोगों के नाम छूटे हैं, वे तय समय के भीतर दावा दाखिल कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर BLO दोबारा फील्ड वेरिफिकेशन भी कर सकते हैं। दस्तावेज और दावा सही मिलने पर नाम अंतिम सूची में शामिल किया जा सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल पात्र वोटरों का

SIR का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट से बाहर होने के बाद असली चिंता यह है कि इनमें कितने नाम वास्तव में हटाए जाने योग्य हैं और कितने पात्र मतदाता सत्यापन में छूट गए। इसका स्पष्ट जवाब दावे-आपत्तियों की जांच और 4 नवंबर को जारी होने वाली अंतिम सूची के बाद ही सामने आएगा।

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Author: The Hindi Post