खराब नींद, दिनभर थकान, आंखों में जलन और भारीपन जैसी समस्याएं आज आम हो गई हैं। इसकी एक बड़ी वजह घंटों तक मोबाइल स्क्रीन देखना भी है। खासतौर पर रात में सोने से पहले रील्स, वीडियो और सोशल मीडिया देखने की आदत शरीर और दिमाग को आराम करने नहीं देती।
ब्लू लाइट बिगाड़ सकती है नींद
डॉक्टर अमित कुमार मंडल के अनुसार, सोने से कम से कम एक घंटे पहले फोन दूर रखने से शरीर को स्वाभाविक रूप से नींद के लिए तैयार होने का समय मिलता है। मोबाइल और अन्य स्क्रीन की तेज रोशनी, खासकर ब्लू लाइट, शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की प्रक्रिया यानी सर्केडियन रिदम को प्रभावित कर सकती है।
मेलाटोनिन पर पड़ता है असर
रात के समय स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव पर असर पड़ सकता है। यह हार्मोन शरीर को संकेत देता है कि अब आराम और सोने का समय है। इसलिए सोने से पहले फोन से दूरी बनाने पर दिमाग को धीरे-धीरे शांत होने और नींद आने में मदद मिल सकती है।
सिर्फ पांच मिनट, फिर घंटों स्क्रीन
मोबाइल की समस्या सिर्फ ब्लू लाइट तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, रील्स, खबरें, काम के मैसेज और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन दिमाग को सक्रिय बनाए रखते हैं। अक्सर लोग कुछ मिनट फोन देखने के लिए उठाते हैं, लेकिन देखते-देखते काफी समय बीत जाता है और सोने का समय आगे खिसक जाता है।
फोन छोड़कर अपनाएं ये आसान आदतें
सोने से एक घंटा पहले फोन अलग रखकर किताब पढ़ना, हल्की स्ट्रेचिंग करना, ध्यान लगाना या परिवार के साथ शांत बातचीत करना बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ये गतिविधियां दिमाग को धीरे-धीरे रिलैक्स करने में मदद करती हैं और शरीर को आराम की स्थिति में ले जाती हैं।
अच्छी नींद के लिए दिनचर्या भी जरूरी
केवल फोन बंद कर देना हर तरह की नींद की समस्या का इलाज नहीं है। पर्याप्त नींद लेना, रोज लगभग एक ही समय पर सोना और उठना तथा स्वस्थ दिनचर्या अपनाना भी जरूरी है। अगर स्क्रीन से दूरी बनाने की आदत को नियमित बनाया जाए, तो नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और अगले दिन शरीर ज्यादा तरोताजा महसूस कर सकता है।