रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन राखी बांधने से पहले बहन भाई को तिलक लगाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही विधि और श्रद्धा से किया गया यह पूजन भाई के अच्छे स्वास्थ्य, यश और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा माना जाता है।
पूजा की थाली ऐसे करें तैयार
राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार कर लें। इसमें रोली या कुमकुम, अक्षत यानी साबुत चावल, चंदन, दीपक, मिठाई और रक्षासूत्र रखें। मान्यता है कि पूजा की सामग्री को व्यवस्थित तरीके से तैयार करने और पूरे भाव से पूजा करने से घर में सकारात्मक माहौल और खुशहाली बनी रहती है।
भाई को किस दिशा में बैठाएं
तिलक लगाने से पहले दिशा का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। धार्मिक परंपरा के अनुसार भाई के सिर पर साफ कपड़ा या टोपी होना चाहिए। बहन भी पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर पूजा की शुरुआत कर सकती है।
तिलक और अक्षत लगाने का नियम
सबसे पहले बहन भाई के माथे पर रोली, कुमकुम या चंदन का तिलक लगाए। मान्यता के अनुसार इसे दाहिने हाथ के अंगूठे या अनामिका उंगली से नीचे से ऊपर की ओर लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद तिलक पर साबुत अक्षत लगाएं। टूटे हुए चावल की जगह अखंडित चावल का इस्तेमाल करने की परंपरा है।
आरती के बाद बांधें रक्षासूत्र
तिलक और अक्षत लगाने के बाद भाई की आरती करें। इसके बाद उसकी दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधने की परंपरा है। अंत में भाई को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं। धार्मिक मान्यताओं में आरती को नकारात्मक प्रभाव दूर करने और रक्षासूत्र को भाई की मंगलकामना से जोड़ा जाता है।
श्रद्धा से मनाएं त्योहार
रक्षाबंधन की पूजा में विधि के साथ भावना को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। तिलक, अक्षत, आरती और रक्षासूत्र की यह परंपरा भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक है। इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। बहनें पूरे प्रेम और श्रद्धा के साथ भाई की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना कर सकती हैं।