देश में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर चिंता बढ़ रही है। दिल्ली में मामलों में बढ़ोतरी के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें मरीजों की जांच, इलाज और अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की गई। बदलते मौसम में फ्लू जैसे संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं, इसलिए इसके लक्षण और बचाव के तरीकों की जानकारी होना जरूरी है।
H1N1 क्या है और कैसे फैलता है?
H1N1 इन्फ्लुएंजा A वायरस से होने वाला सांस से जुड़ा संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बात करने या सांस लेने से निकलने वाली छोटी बूंदों के जरिए यह दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण का खतरा रहता है। यह वायरस नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
स्वाइन फ्लू होने पर बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, थकान और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में बीमारी हल्की रहती है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर भी हो सकती है। खास बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखने से करीब एक दिन पहले भी वायरस फैला सकता है। बच्चों में संक्रमण लंबे समय तक फैलने की संभावना रहती है।
हाथों की सफाई सबसे जरूरी
H1N1 से बचने के लिए हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकें। आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें। घर में दरवाजों के हैंडल और दूसरी ज्यादा छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से साफ रखना भी संक्रमण का खतरा कम करने में मदद कर सकता है।
लक्षण हों तो दूसरों से दूरी रखें
अगर आपको फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो संभव हो तो घर पर रहें और दूसरों के संपर्क में कम आएं। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों से दूरी रखना जरूरी है। फ्लू की वैक्सीन भी H1N1 समेत कुछ इन्फ्लुएंजा संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकती है। ध्यान रखें, स्वाइन फ्लू सूअर का मांस खाने से नहीं फैलता।
इन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से मिलें
सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार चक्कर आना, शरीर में पानी की कमी, बहुत ज्यादा कमजोरी या तेज मांसपेशियों का दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्था, अस्थमा, डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसी स्थितियों में फ्लू के लक्षण दिखने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। बच्चों में सांस लेने में परेशानी या शरीर का रंग नीला पड़ना जैसे गंभीर संकेत दिखें, तो तुरंत मेडिकल मदद लें।