NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA में बड़े संस्थागत सुधार की जरूरत बताई है। 19 अगस्त को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने केंद्र से पूछा कि राधाकृष्णन कमेटी और नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स की सिफारिशों पर अब तक क्या काम हुआ है। कोर्ट ने साफ किया कि सुधार केवल नई नियुक्तियों या तकनीकी बदलावों तक सीमित नहीं होने चाहिए।
कोर्ट चाहता है संस्था के पास अनुभव रहे
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य चिंता यह है कि अधिकारियों के ट्रांसफर या रिटायरमेंट के बाद उनकी विशेषज्ञता भी संस्था से बाहर न चली जाए। NTA में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे परीक्षा कराने का अनुभव, प्रक्रियाओं की जानकारी और तकनीकी विशेषज्ञता लगातार संस्थान के भीतर बनी रहे। इसी वजह से कोर्ट ने UPSC का उदाहरण सामने रखा।
UPSC की सबसे बड़ी ताकत संस्थागत मेमोरी
UPSC संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 के तहत बना संवैधानिक निकाय है। इसका अपना स्थायी सचिवालय है, जहां परीक्षा और भर्ती से जुड़े अलग-अलग विभाग काम करते हैं। अधिकारियों के बदलने के बावजूद व्यवस्था चलती रहती है। यही संस्थागत निरंतरता NTA के लिए भी जरूरी मानी जा रही है।
प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह सार्वजनिक नहीं
UPSC के पेपर तैयार करने की अंदरूनी प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से पूरी तरह उपलब्ध नहीं है। इसलिए पेपर के कितने सेट बनते हैं या कौन से विशेषज्ञ किस स्तर पर शामिल होते हैं, इस पर निश्चित दावा करना सही नहीं होगा। इतना जरूर है कि अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों की मदद से प्रश्नपत्र तैयार होते हैं और परीक्षा सामग्री की गोपनीयता बनाए रखने की व्यवस्था रहती है।
परीक्षा संचालन में सुरक्षा सबसे अहम
UPSC की परीक्षाओं में केंद्रों, पर्यवेक्षकों और परीक्षा संचालन से जुड़े स्पष्ट नियम होते हैं। प्रश्नपत्र और परीक्षा सामग्री की सुरक्षा भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि पैकिंग, ट्रांसपोर्ट और पेपर खोलने की पूरी अंदरूनी प्रक्रिया सार्वजनिक दस्तावेजों में विस्तार से उपलब्ध नहीं है। गड़बड़ी होने पर जवाबदेही तय करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था भी रहती है।
तीन चरणों से गुजरती है सिविल सेवा परीक्षा
UPSC सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों में होती है- प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण। हर चरण के बाद परिणाम जारी किए जाते हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और परिणाम तैयार करने में गोपनीयता का ध्यान रखा जाता है। रिजल्ट अलग-अलग चरणों में अलग फॉर्मेट में जारी किए जाते हैं।
हर साल कई बड़ी परीक्षाएं कराता है UPSC
UPSC केवल सिविल सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह भारतीय वन सेवा, इंजीनियरिंग सेवा, संयुक्त रक्षा सेवा समेत कई परीक्षाएं आयोजित करता है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रियाएं भी आयोग के जरिए होती हैं। सिविल सेवा परीक्षा में हर साल लाखों उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होते हैं।
NTA के लिए असली सीख क्या है
सुप्रीम कोर्ट का संदेश सिर्फ सुरक्षित पेपर कराने तक सीमित नहीं है। NTA को ऐसी मजबूत संस्था बनाना होगा, जहां साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च और परीक्षा संचालन की विशेषज्ञता लंबे समय तक बनी रहे। UPSC का उदाहरण इसी संस्थागत अनुभव और निरंतरता की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि सरकार NTA में इन सुधारों को कितनी तेजी से लागू करती है।