हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए खास माना जाता है। साल में आने वाली 24 एकादशियों में सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का भी विशेष महत्व बताया गया है। पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को सुबह 2 बजे शुरू होगी और 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा।
एकादशी पर चावल खाने से क्यों बचते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले लोग तो चावल से पूरी तरह परहेज करते ही हैं, लेकिन व्रत न रखने वाले लोगों को भी इस दिन चावल न खाने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि एकादशी पर खान-पान में संयम रखना व्रत और पूजा की परंपरा का हिस्सा है।
तुलसी के पत्ते इस दिन न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि, धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए। अगर पूजा के लिए तुलसी की जरूरत हो तो एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लेने की परंपरा है। इससे तुलसी के पौधे के प्रति श्रद्धा भी बनी रहती है।
बाल और नाखून काटना भी माना जाता है वर्जित
पुत्रदा एकादशी के दिन बाल और नाखून काटने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी को पूजा, साधना और आत्मसंयम का दिन माना गया है। इसलिए इस दिन शरीर से जुड़े ऐसे कामों को टालने की परंपरा है। जरूरत हो तो बाल और नाखून एकादशी से पहले या बाद में काटे जा सकते हैं।
जीवों को नुकसान और बुरे व्यवहार से बचें
एकादशी के दिन किसी जीव को नुकसान पहुंचाना या जीव हत्या करना धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना जाता है। इस दिन अहिंसा और दया का पालन करने की बात कही गई है। साथ ही झूठ बोलने, अपमान करने, विवाद करने, छल-कपट करने और किसी को नुकसान पहुंचाने से भी बचना चाहिए। यानी इस दिन केवल भोजन ही नहीं, बल्कि विचारों और व्यवहार पर भी संयम रखने की परंपरा है।
पुत्रदा एकादशी का क्या है धार्मिक महत्व?
पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से संतान सुख की कामना पूरी होने और परिवार में सुख-समृद्धि आने का आशीर्वाद मिलता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका पालन व्यक्ति अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करता है।