NEET विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA पर बड़ा सवाल, परीक्षा सिस्टम बदलने के लिए अब संस्थागत सुधार जरूरी

NEET पेपर लीक विवाद के बाद देश में परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर चिंता जताई है। 18 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को भरोसेमंद तरीके से कराने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को एक मजबूत और स्थायी संस्था के रूप में विकसित करना जरूरी है। कोर्ट के मुताबिक सिर्फ पेपर सुरक्षित रखने से समस्या हल नहीं होगी।

परीक्षा सिस्टम में तकनीक और जवाबदेही जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में अनुभव, आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा और जवाबदेही को संस्थागत रूप देना होगा। अगर अधिकारी लगातार बदलते रहेंगे तो उनके साथ परीक्षा संचालन का अनुभव भी खत्म होता रहेगा। इसलिए NTA में स्थायी और प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त मैनपावर, साइबर सुरक्षा और रिसर्च एंड डेवलपमेंट की व्यवस्था जरूरी है।

अभी NTA किस तरह कराता है राष्ट्रीय परीक्षाएं?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मौजूदा व्यवस्था की जानकारी कोर्ट को दी। इसके तहत विशेषज्ञों की मदद से बड़ा प्रश्न बैंक तैयार किया जाता है। फिर अलग-अलग स्तर पर सवालों का चयन करके कई प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। प्रिंटिंग के दौरान CCTV और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी रहती है। प्रश्नपत्र सुरक्षित बॉक्स में रखे जाते हैं और GPS से ट्रैक कर बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाए जाते हैं।

AI और ब्लॉकचेन से बढ़ सकती है परीक्षा सुरक्षा

परीक्षा सुधारों के लिए AI और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। ब्लॉकचेन के जरिए संवेदनशील डेटा और प्रश्नपत्र की गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकता है। इससे पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी गोपनीय दस्तावेज तक किसने और कब पहुंच बनाई। वहीं AI असामान्य गतिविधियों और संभावित गड़बड़ियों की पहचान करने में मदद कर सकता है।

राधाकृष्णन और नीलेकणी समितियों ने क्या सुझाया?

NEET-UG विवाद के बाद 2024 में राधाकृष्णन समिति बनाई गई थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय परीक्षाओं की व्यवस्था की समीक्षा करना और उन्हें सुरक्षित बनाने के सुझाव देना था। समिति ने NTA को मजबूत करने, उसका दायरा सीमित करने, कंप्यूटर आधारित परीक्षा, डिजिटल पहचान और परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा जैसे सुझाव दिए। वहीं 2026 में नंदन नीलेकणी समिति ने AI, ब्लॉकचेन, डिजिटल लॉकिंग, CBT और साइबर सुरक्षा जैसे उपायों पर सुझाव दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने भी बदलाव की मांग उठाई

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अलग-अलग याचिकाओं में NTA की संरचना और परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग की गई है। कुछ याचिकाकर्ताओं ने NTA के पुनर्गठन या उसकी जगह स्वतंत्र राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाने की मांग की है। CBT मॉडल, डिजिटल लॉकिंग और केंद्रवार परिणाम जारी करने जैसे सुझाव भी दिए गए हैं। अब कोर्ट की सुनवाई के बीच बड़ा सवाल यही है कि देश की परीक्षा व्यवस्था को कितना सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकता है।

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Author: The Hindi Post