Digital Detox: रील्स की लत छोड़कर सिर्फ 7 दिन देखें बदलाव, दिमाग से नींद तक ऐसे बदल सकती है आपकी रोजमर्रा की जिंदगी

सुबह उठते ही फोन देखना, खाना खाते समय रील्स चलाना और रात को सोने से पहले लगातार स्क्रॉल करना अब कई लोगों की रोज की आदत बन चुका है। हर कुछ सेकंड में नया और मजेदार कंटेंट मिलने की उम्मीद लोगों को अगली वीडियो देखने के लिए मजबूर करती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर नए वीडियो से दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम एक्टिव होता है, जिससे बार-बार रील्स देखने की आदत मजबूत हो सकती है।

पहले दो दिन बढ़ सकती है बेचैनी

अगर आप अचानक रील्स देखना बंद करते हैं तो शुरुआत आसान नहीं हो सकती। पहले एक-दो दिनों में बार-बार फोन चेक करने का मन, बोरियत या बेचैनी महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्क्रॉलिंग धीरे-धीरे एक ऑटोमैटिक आदत बन जाती है। इंतजार करते समय, तनाव में या खाली बैठने पर हाथ अपने आप फोन की तरफ जाने लगता है। रील्स से दूरी बनाने पर दिमाग को इस बदलाव के साथ तालमेल बैठाने में थोड़ा समय लगता है।

हफ्ते के बीच फोकस बेहतर हो सकता

डॉक्टर प्रीति सिंह, सीनियर कंसलटेंट और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, पारस हेल्थ गुरुग्राम के मुताबिक, 7 दिनों तक रील्स और दूसरे शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट से ब्रेक लेने से मानसिक सेहत, ध्यान और रोज की दिनचर्या पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है, लेकिन लगातार स्क्रॉलिंग कम होने पर दिमाग को बार-बार मिलने वाले तेज स्टिम्युलेशन से राहत मिलती है। इससे कुछ लोगों को काम और बातचीत पर ज्यादा देर तक ध्यान देना आसान लग सकता है।

बार-बार फोन देखने की वजह समझ आएगी

रील्स से दूरी बनाने का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि आपको अपनी फोन इस्तेमाल करने की आदत समझ आने लगे। आपको पता चल सकता है कि आप सबसे ज्यादा फोन कब उठाते हैं—खाली समय में, तनाव के दौरान या किसी काम से बचने के लिए। धीरे-धीरे बिना तुरंत मनोरंजन खोजे किसी काम में लगे रहना आसान हो सकता है। इससे रोजमर्रा की गतिविधियों में वर्तमान पल पर ध्यान देना भी बेहतर हो सकता है।

देर रात की स्क्रॉलिंग से मिलेगी राहत

अगर आपकी आदत सोने से पहले रील्स देखने की है तो एक हफ्ते का ब्रेक नींद के रूटीन में भी मदद कर सकता है। रात में लगातार स्क्रीन देखने और हर बार ‘बस एक और वीडियो’ देखने की आदत कम होने से सोने से पहले दिमाग को शांत होने का समय मिल सकता है। इससे कुछ लोगों को जल्दी सोने और बेहतर नींद का अनुभव हो सकता है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

सात दिन बाद आदतों पर नियंत्रण

एक हफ्ते के अंत तक सबसे बड़ा बदलाव शरीर में नहीं, बल्कि आपकी आदतों और फोन इस्तेमाल करने के तरीके में नजर आ सकता है। आपको समझ आने लग सकता है कि रील्स क्यों और कब देखते हैं। हालांकि 7 दिन का ब्रेक सोशल मीडिया की आदत को पूरी तरह खत्म नहीं करता। लंबे समय के लिए सोने से पहले रील्स बंद करना, एक्सरसाइज करना, किताब पढ़ना और परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताना ज्यादा संतुलित डिजिटल रूटीन बनाने में मदद कर सकता है।

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Author: The Hindi Post