आज कई बच्चों की आदत बन गई है कि खाना खाते समय उनके हाथ में फोन जरूर हो। टीवी और वीडियो से आगे अब रील्स ने इस आदत को और बढ़ा दिया है। कुछ सेकंड में नया वीडियो मिलने से लगातार अगली रील देखने की इच्छा होती है। यही आदत धीरे-धीरे बच्चों को स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने की ओर ले जा सकती है।
खाना और स्क्रीन साथ क्यों खतरनाक?
कई माता-पिता बच्चे को आसानी से खाना खिलाने के लिए मोबाइल दे देते हैं। शुरुआत में यह सुविधाजनक लगता है, लेकिन बच्चा अगर लंबे समय तक फोन देखते हुए खाना खाता रहे तो समस्या बढ़ सकती है। स्क्रीन पर पूरा ध्यान होने के कारण बच्चा खाने की मात्रा, स्वाद और शरीर के संकेतों पर ध्यान कम दे पाता है। इससे खाने का तरीका भी प्रभावित हो सकता है।
ठीक से न चबाने से पाचन प्रभावित
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. शुचिन बजाज के मुताबिक, फोन देखते हुए बच्चे अक्सर खाने को ठीक से चबाने पर ध्यान नहीं देते। बड़े निवाले जल्दी निगलने से पेट फूलना, गैस, अपच और पेट में भारीपन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए बच्चों को खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने की आदत डालना जरूरी है।
रील्स देखते हुए ज्यादा खाना
स्क्रीन के साथ खाने की एक बड़ी समस्या जरूरत से ज्यादा खाना भी हो सकती है। शरीर का पेट भरने का संकेत दिमाग तक पहुंचने में कुछ समय लगता है। लेकिन जब बच्चे का ध्यान लगातार रील्स पर होता है तो वह अपने भूख और पेट भरने के संकेतों को नजरअंदाज कर सकता है। इससे जरूरत से ज्यादा खाने की आदत बन सकती है और लंबे समय में वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है।
चिप्स और रील्स का खतरनाक कॉम्बिनेशन
अगर बच्चा रील्स देखते हुए चिप्स, नमकीन, बिस्किट या दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खा रहा है तो समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थ कैलोरी, नमक और कई बार अतिरिक्त चीनी से भरपूर होते हैं। स्क्रीन के कारण खाने की मात्रा पर ध्यान न रहने से बच्चा जरूरत से ज्यादा खा सकता है। लंबे समय में इससे मोटापा, कब्ज और अस्वस्थ खाने की आदतों का जोखिम बढ़ सकता है।
बच्चों को माइंडफुल ईटिंग सिखाएं
समस्या सिर्फ पाचन या वजन तक सीमित नहीं है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि खाना खाते समय उनका ध्यान खाने पर होना चाहिए, मोबाइल पर नहीं। स्क्रीन की आदत अचानक खत्म करने के बजाय धीरे-धीरे बदलाव करें। खाने के समय फोन अलग रखें, बच्चे को परिवार के साथ बैठकर खाना खिलाएं और उसे धीरे-धीरे खाने दें। सिर्फ हेल्दी खाना देना काफी नहीं है, बच्चों को हेल्दी तरीके से खाना भी सिखाना जरूरी है।