सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है। यह पर्व खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया पूजन मन को शांति देता है।
पूजा से पहले सामग्री की पूरी तैयारी रखें
हरियाली तीज की पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह रख लेना बेहतर होता है। माता पार्वती को मेहंदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, रोली और लाल चुनरी अर्पित की जाती है। वहीं भगवान शिव के लिए जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्र रखे जाते हैं। इसके अलावा फूल, फल, अक्षत, धूप, दीपक, घी, रुई की बाती और मिठाई भी पूजा में काम आती है।
हरे कपड़ों और चूड़ियों का भी महत्व
हरियाली तीज के दिन हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। महिलाएं हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनकर पूजा करती हैं। पूजा की तैयारी पूरी करने के बाद सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं। हालांकि व्रत अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही रखना चाहिए।
शाम को ऐसे करें शिव-पार्वती की पूजा
शाम के समय पूजा के लिए एक साफ जगह पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर दोनों का ध्यान करें। इसके बाद भगवान शिव को जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करें।
कथा और आरती के बिना पूजा अधूरी
पूजन के दौरान हरियाली तीज की कथा पढ़ना या सुनना महत्वपूर्ण माना जाता है। कथा पूरी होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा से भगवान का स्मरण करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तरह पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
पूजा के बाद बड़ों का आशीर्वाद जरूर लें
आरती और भोग के बाद पूजा को विधिवत पूरा करें। इसके बाद घर के बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। हरियाली तीज केवल व्रत रखने का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और परिवार की खुशहाली की कामना का भी अवसर है। पूजा में सबसे जरूरी चीज श्रद्धा और नियमों का पालन माना जाता है।