Reels की चमक में डूबते Gen-Z, वायरल होने की होड़ कहीं युवाओं का भविष्य तो नहीं बिगड़ रहा?

एक समय था जब युवा वैज्ञानिकों, लेखकों, खिलाड़ियों और फिल्मी सितारों की मेहनत से प्रेरणा लेते थे। आज स्मार्टफोन की स्क्रीन पर नजर डालते ही तस्वीर काफी बदल चुकी है। कुछ सेकेंड की रील्स में अजीब डांस, शोर-शराबा, मजाक और विवादित कंटेंट आसानी से लाखों व्यूज बटोर रहा है। समस्या मनोरंजन से नहीं, बल्कि तब शुरू होती है जब युवा इन्हीं वायरल चेहरों को सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण मानने लगते हैं। सोशल मीडिया की चमक में असली मेहनत और उपलब्धियां पीछे छूटती दिख रही हैं।

वायरल कंटेंट को मिल रही जबरदस्त लोकप्रियता

इंस्टाग्राम रील्स पर ऐसे कई क्रिएटर हैं, जिनके साधारण या अजीबोगरीब वीडियो भी करोड़ों व्यूज हासिल कर लेते हैं। कभी कपड़े बदलकर मजाक किया जाता है, तो कभी सड़क, घर या किचन में सामान्य सी गतिविधि को मनोरंजन बनाकर पेश किया जाता है। इन वीडियो की लोकप्रियता देखकर कई युवाओं को लगता है कि सोशल मीडिया पर फेमस होना ही सफलता का आसान रास्ता है। लेकिन करोड़ों व्यूज मिलना किसी कंटेंट की गुणवत्ता या उसके सामाजिक महत्व की गारंटी नहीं है।

लगातार स्क्रॉलिंग से ध्यान पर असर

शॉर्ट वीडियो का लगातार इस्तेमाल युवाओं की ध्यान केंद्रित करने की आदत को प्रभावित कर सकता है। हर कुछ सेकेंड में नया वीडियो, नया चेहरा या नया कंटेंट मिलने से दिमाग लगातार बदलाव का आदी हो जाता है। इसका असर पढ़ाई, किताब पढ़ने या किसी गंभीर विषय पर लंबे समय तक ध्यान देने पर पड़ सकता है। हर बार नया और तेज मनोरंजन तलाशने की आदत युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही है। हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।

विवाद बन गया वायरल होने का हथियार

सोशल मीडिया पर कुछ क्रिएटर विवाद, प्रैंक, गाली-गलौच या लोगों को परेशान करने वाले कंटेंट के जरिए भी तेजी से लोकप्रिय होते हैं। इससे एक गलत संदेश जा सकता है कि चर्चा में आने के लिए कुछ भी करना ठीक है। कई युवा वायरल होने की चाह में ऐसे ही प्रयोग करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि एक वीडियो हिट हुआ तो जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन सोशल मीडिया की लोकप्रियता अक्सर अस्थायी होती है और वायरल फेम हमेशा वास्तविक सफलता में नहीं बदलता।

रील्स करियर नहीं, सोचने की जरूरत

सोशल मीडिया से कमाई और करियर बनाना गलत नहीं है। आज कई लोग अच्छी और रचनात्मक सामग्री के जरिए सफल भी हो रहे हैं। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब युवा पढ़ाई, कौशल और मेहनत को नजरअंदाज करके सिर्फ वायरल होने को लक्ष्य बना लेते हैं। कुछ सेकेंड की लोकप्रियता को जिंदगी की उपलब्धि समझना सही नहीं है। असली सफलता के लिए ज्ञान, हुनर, अनुशासन और लगातार मेहनत की जरूरत होती है।

फोन की स्क्रीन से बाहर भी है दुनिया

रील्स देखना मनोरंजन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके लिए पूरा दिन स्क्रीन पर बिताना जरूरी नहीं है। युवाओं को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जिंदगी अक्सर वास्तविक जिंदगी की पूरी तस्वीर नहीं होती। इसलिए फोन और रील्स के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। समय का कुछ हिस्सा पढ़ाई, खेल, किताबों, कला और नए कौशल सीखने में लगाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। वायरल होना लक्ष्य नहीं, अपने जीवन में कुछ बेहतर करना असली सफलता होनी चाहिए।

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Author: The Hindi Post