रील्स और शॉर्ट वीडियो आज सोशल मीडिया का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। कम समय में मनोरंजन और अलग-अलग तरह का कंटेंट मिलने के कारण लोग एक वीडियो खत्म होते ही दूसरा देखने लगते हैं। यही सिलसिला कई बार घंटों तक चलता रहता है। लगातार स्क्रॉल करने की आदत अब चिंता का विषय बन रही है, क्योंकि कुछ लोगों के लिए वीडियो देखना बंद करना मुश्किल हो जाता है।
10 हजार से ज्यादा यूजर्स पर हुई रिसर्च
चीन की Tsinghua University और National University of Defense Technology के रिसर्चर्स ने शॉर्ट वीडियो की लत से जुड़े पैटर्न को समझने के लिए ‘Can’t Stop Scrolling’ नाम से रिसर्च की। यह अध्ययन 2025 में प्रकाशित हुआ। इसमें सर्वे, इंटरव्यू और शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म के यूजर डेटा का इस्तेमाल किया गया। रिसर्चर्स ने 10,111 ऐसे यूजर्स के डेटा का विश्लेषण किया, जिन्हें शॉर्ट वीडियो की लत से जुड़ी कैटेगरी में रखा गया था।
ज्यादा समय और रात की स्क्रॉलिंग बड़ा संकेत
रिसर्च में सामने आया कि लंबे समय तक शॉर्ट वीडियो देखना और लगातार कई वीडियो देखते रहना लत से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। खासतौर पर रात में लंबे समय तक स्क्रॉल करना भी इस पैटर्न से जुड़ा पाया गया। हालांकि, सिर्फ बार-बार ऐप खोलना लत का पक्का संकेत नहीं माना गया। ज्यादा समस्या वाले यूजर्स अक्सर एक ही तरह की वीडियो कैटेगरी देखते पाए गए, यानी उनके कंटेंट का दायरा सीमित हो सकता है।
युवाओं में ज्यादा दिखा लत का पैटर्न
अध्ययन में अलग-अलग उम्र के यूजर्स के वीडियो देखने के पैटर्न को भी देखा गया। इसमें 13 से 24 साल की उम्र के लोगों में शॉर्ट वीडियो की लत से जुड़े मामले ज्यादा नजर आए। खास तौर पर 18 से 24 साल के यूजर्स में यह पैटर्न ज्यादा देखा गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ युवा ही प्रभावित होते हैं। लंबे समय तक वीडियो देखने की आदत किसी भी उम्र में परेशानी पैदा कर सकती है।
ऐसे रोकें रील्स देखने की आदत
अगर रील्स या शॉर्ट वीडियो देखते हुए समय का पता नहीं चलता, तो सबसे पहले रोजाना देखने की सीमा तय करें। रात में सोने से पहले लंबे समय तक स्क्रॉल करने से बचें। फोन में मौजूद Screen Time या App Limit फीचर का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है। खाली समय में टहलना, किताब पढ़ना, एक्सरसाइज करना या परिवार-दोस्तों के साथ समय बिताना जैसी दूसरी गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
नींद और रोजमर्रा के काम प्रभावित हों तो सावधान
अगर शॉर्ट वीडियो देखने की आदत इतनी बढ़ गई है कि पढ़ाई, काम, नींद या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश के साथ किसी मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर से सलाह लेना बेहतर हो सकता है। असली लक्ष्य वीडियो पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल हमारी दिनचर्या को नियंत्रित न करने लगे।