SC/ST-OBC आरक्षण में आय आधारित सब-कोटा पर केंद्र सख्त, सुप्रीम कोर्ट में कहा- गरीबी नहीं बदल सकती आरक्षण का आधार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा है कि SC, ST और OBC आरक्षण के भीतर केवल आय या गरीबी के आधार पर अलग से प्राथमिकता या सब-कोटा नहीं दिया जा सकता। सरकार ने इस मांग का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था सामाजिक और ऐतिहासिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर। इसलिए केवल आय को आधार बनाकर आरक्षण में बदलाव करना उचित नहीं होगा।

किसने दायर की है याचिका?

यह जनहित याचिका उत्तर प्रदेश के रहने वाले रमाशंकर प्रजापति और यमुना प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। याचिका में मांग की गई है कि SC, ST, OBC और EWS आरक्षण के भीतर गरीब लोगों को पहले लाभ देने के लिए आय आधारित प्राथमिकता तय की जाए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस संबंध में केंद्र सरकार को नीति बनाने का निर्देश देने की मांग की है।

केंद्र ने क्या दिया तर्क?

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की ओर से दायर हलफनामे में केंद्र ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य उन समुदायों को अवसर देना है, जो लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और पिछड़ेपन का सामना करते रहे हैं। सरकार ने कहा कि केवल आर्थिक स्थिति को आधार बनाकर आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।

संसद के अधिकार का भी जिक्र

केंद्र सरकार ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत SC और ST की सूची में बदलाव करने का अधिकार केवल संसद के पास है। इसी तरह OBC की केंद्रीय सूची में किसी भी तरह का संशोधन भी संसद द्वारा बनाए गए कानून के जरिए ही संभव है। अदालत, राज्य सरकार या कोई ट्रिब्यूनल इन सूचियों में बदलाव नहीं कर सकता।

क्रीमी लेयर पर भी स्थिति साफ

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘क्रीमी लेयर’ का सिद्धांत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) पर लागू नहीं होता। यानी इन वर्गों के आरक्षण को आर्थिक आधार पर सीमित करने या उसमें प्राथमिकता तय करने का मौजूदा संवैधानिक प्रावधान नहीं है। हालांकि राज्यों के पास अपने OBC वर्गों की अलग सूची बनाने का अधिकार है।

याचिका खारिज करने की मांग

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि नीति बनाना विधायिका और कार्यपालिका का काम है, न कि न्यायपालिका का। इसलिए अदालत किसी सरकार को नई आरक्षण नीति बनाने का आदेश नहीं दे सकती। इसी आधार पर केंद्र ने इस जनहित याचिका को भारी जुर्माने के साथ खारिज करने की मांग की है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।

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Author: The Hindi Post