भारत में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने Vehicle-to-Vehicle (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम का ड्राफ्ट जारी किया है। इस तकनीक के जरिए सड़क पर चलने वाली गाड़ियां एक-दूसरे को जरूरी जानकारी भेज सकेंगी। इसका मकसद सड़क हादसों को कम करना और ड्राइविंग को ज्यादा सुरक्षित बनाना है। फिलहाल इस ड्राफ्ट पर लोगों और ऑटो कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं।
कब से होगा लागू
ड्राफ्ट के अनुसार 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले सभी नए वाहनों में V2V सिस्टम लगाना जरूरी होगा। यह नियम कार, बाइक, स्कूटर, बस और ट्रक समेत सभी नए वाहनों पर लागू होगा। अगर कोई कंपनी 2027 से ही इस तकनीक को अपनाना चाहती है, तो उसे भी सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार ही सिस्टम लगाना होगा।
कैसे करेगी गाड़ी बात
हर वाहन में एक छोटा डिवाइस लगाया जाएगा, जो लगातार आसपास की दूसरी गाड़ियों को रेडियो सिग्नल भेजेगा। इन सिग्नलों में वाहन की स्पीड, लोकेशन, दिशा और ब्रेक लगाने जैसी अहम जानकारी होगी। यह जानकारी 150 से 900 मीटर तक की दूरी पर मौजूद दूसरी गाड़ियों तक पहुंच सकती है। खास बात यह है कि इसके लिए मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी।
ड्राइवर को मिलेगा अलर्ट
अगर आगे चल रही कोई गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, रॉन्ग साइड से कोई वाहन आता है या पीछे से एम्बुलेंस आ रही होती है, तो V2V सिस्टम पहले ही ड्राइवर को चेतावनी दे देगा। यहां तक कि अगर कोई वाहन मोड़ या धुंध की वजह से दिखाई नहीं दे रहा हो, तब भी सिस्टम रेडियो सिग्नल के जरिए खतरे की जानकारी दे सकता है। इससे समय रहते ड्राइवर सतर्क हो सकेगा।
ADAS के साथ करेगा काम
आज कई नई गाड़ियों में ADAS (Advanced Driver Assistance System) दिया जाता है, जो कैमरे और सेंसर की मदद से आसपास की स्थिति पर नजर रखता है। V2V सिस्टम इसके साथ मिलकर काम करेगा और उन खतरों की भी जानकारी देगा, जिन्हें कैमरे या सेंसर नहीं देख पाते। इससे सड़क पर सुरक्षा का स्तर पहले से काफी बेहतर हो सकता है।
अभी रहेंगी कुछ चुनौतियां
शुरुआत में यह तकनीक सिर्फ नई गाड़ियों में होगी, इसलिए पुरानी गाड़ियां इसका हिस्सा नहीं बन पाएंगी। ऐसी स्थिति में नई गाड़ियां पुरानी गाड़ियों को कैमरे और सेंसर की मदद से पहचानेंगी। हालांकि, सड़क पर अचानक आने वाले पैदल यात्री, साइकिल, आवारा पशु या अन्य बाधाओं से बचने के लिए ड्राइवर को अब भी पूरी सतर्कता रखनी होगी। जैसे-जैसे अधिक वाहन इस तकनीक से जुड़ेंगे, सड़कें पहले से ज्यादा सुरक्षित होने की उम्मीद है।