हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर फैंस उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना कर रहे हैं।
आर्मी नहीं, फिल्मों में बनाई पहचान
21 जनवरी 1953 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में जन्मे प्रदीप रावत के पिता एम.एस. रावत भारतीय सेना में थे। प्रदीप भी सेना में जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने जबलपुर के एक बैंक में नौकरी की। बाद में अभिनेता राज बब्बर के थिएटर ग्रुप ‘एकजुट’ से जुड़े और यहीं से उनके अभिनय करियर की शुरुआत हुई।
‘मेरी जंग’ से शुरू हुआ सफर
प्रदीप रावत ने 1985 में सुभाष घई की फिल्म ‘मेरी जंग’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, भोजपुरी, नेपाली, बंगाली और अंग्रेजी फिल्मों में भी अभिनय किया। छोटे पर्दे पर भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
महाभारत से घर-घर में पहचान
टीवी की दुनिया में प्रदीप रावत को पहला बड़ा मौका बी.आर. चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक ‘महाभारत’ में मिला। इसमें उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। उनकी दमदार आवाज, मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस और गंभीर अभिनय ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
‘गजनी’ का विलेन हमेशा रहेगा याद
करीब 41 साल के लंबे करियर में प्रदीप रावत ने 150 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। आमिर खान की ‘गजनी’ में निभाया गया उनका खतरनाक विलेन आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके अलावा उन्होंने ‘लगान’, ‘सरफरोश’, ‘कोयला’, ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई’ और एस.एस. राजामौली की ‘साई’ जैसी फिल्मों में भी यादगार भूमिकाएं निभाईं।
हमेशा याद रहेंगे प्रदीप रावत
प्रदीप रावत ने अपने अभिनय से हर किरदार में जान डाल दी। चाहे फिल्म हो या टीवी, उन्होंने हर भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया। उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक बेहतरीन कलाकार खो दिया है। उनके यादगार किरदार और शानदार अभिनय हमेशा दर्शकों के दिलों में जिंदा रहेंगे।