हर साल 1 अगस्त को विश्व लंग कैंसर डे मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को फेफड़ों की सेहत और लंग कैंसर के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, धूम्रपान इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन बढ़ता वायु प्रदूषण भी लंग कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। कई बार नॉन-स्मोकर भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
हर किसी को स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, लंग कैंसर स्क्रीनिंग सभी लोगों के लिए नहीं होती। कई लोग सोचते हैं कि सालाना हेल्थ चेकअप या चेस्ट एक्स-रे से कैंसर का पता चल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। स्क्रीनिंग केवल उन लोगों के लिए होती है जिनमें बीमारी का खतरा अधिक होता है, भले ही उन्हें कोई लक्षण न हों।
किन लोगों को करानी चाहिए जांच?
विशेषज्ञों के मुताबिक 50 से 80 साल की उम्र के ऐसे लोग, जिन्होंने लंबे समय तक धूम्रपान किया है और जिनका 20 पैक-ईयर या उससे अधिक का स्मोकिंग इतिहास है, उन्हें स्क्रीनिंग करानी चाहिए। इसके अलावा जो लोग अभी भी धूम्रपान करते हैं या पिछले 15 साल के भीतर सिगरेट छोड़ चुके हैं, उन्हें डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
कैसे होती है स्क्रीनिंग?
लंग कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए लो-डोज सीटी (LDCT) स्कैन किया जाता है। यह सामान्य चेस्ट एक्स-रे या फुल-डोज सीटी स्कैन से अलग होता है। इसमें रेडिएशन की मात्रा कम होती है और अगर व्यक्ति स्क्रीनिंग के लिए योग्य है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार आमतौर पर हर साल यह जांच कराई जाती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, खांसी में खून आना, बिना वजह वजन घटना, सीने में दर्द या सांस फूलने जैसी परेशानी हो रही है, तो इसे सामान्य नहीं समझना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह स्क्रीनिंग का नहीं, बल्कि पूरी मेडिकल जांच का मामला होता है।
समय पर जांच से बच सकती है जान
लंग कैंसर स्क्रीनिंग का उद्देश्य हर व्यक्ति का सीटी स्कैन करना नहीं, बल्कि सही समय पर सही व्यक्ति में बीमारी की पहचान करना है। शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ में आने पर इलाज आसान हो सकता है और मरीज के ठीक होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए जोखिम वाले लोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर जांच जरूर कराएं।