केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे छात्रों और अपने आंदोलन की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि अगर लोग डरें नहीं और एकजुट होकर आवाज उठाएं तो बड़े से बड़ा फैसला भी बदल सकता है। दीपके ने कहा, “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
मीम से शुरू हुआ आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत इसी साल मई में एक मीम के रूप में हुई थी। शुरुआत में इसे व्यंग्य के तौर पर देखा गया, लेकिन धीरे-धीरे यह छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया। NEET-UG पेपर लीक को लेकर बढ़ते विरोध के बीच CJP ने सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी आंदोलन शुरू किया।
छात्रों के विरोध ने पकड़ी रफ्तार
NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ देशभर में छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता गया। अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व किया और आंदोलन को संगठित करने की कोशिश की। उनका दावा है कि लगातार विरोध और छात्रों के दबाव के बाद सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा।
सोनम वांगचुक की रही अहम भूमिका
इस आंदोलन को नई ताकत तब मिली जब क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी इससे जुड़े। उन्होंने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की, जिससे आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। उनकी मौजूदगी से प्रदर्शन पर लोगों और मीडिया का ध्यान लगातार बना रहा, हालांकि बाद में उनके अनशन खत्म होने को लेकर कई सवाल भी उठे।
12 साल बाद अलग तस्वीर
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में कई बड़े विवाद हुए, लेकिन किसी केंद्रीय मंत्री को विरोध प्रदर्शन के दबाव में इस्तीफा नहीं देना पड़ा। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अलग माना जा रहा है। CJP का कहना है कि यह छात्रों की एकजुटता और लंबे आंदोलन का नतीजा है।
आंदोलन ने दिया बड़ा संदेश
अभिजीत दीपके का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया कि संगठित और शांतिपूर्ण आंदोलन से भी बड़े बदलाव संभव हैं। उनका मानना है कि यह सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे की बात नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज और लोकतांत्रिक विरोध की ताकत का उदाहरण है। वहीं, इस घटनाक्रम ने विपक्ष और सरकार दोनों के सामने नए राजनीतिक संदेश भी छोड़े हैं।