Devshayani Ekadashi पर भूलकर भी न करें ये 10 गलतियां, नहीं तो व्रत का फल हो सकता है बेअसर

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होती है, जो देवउठनी एकादशी तक चलता है। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचने की परंपरा है।

व्रत और पूजा का महत्व

देवशयनी एकादशी के दिन श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को जीवन में खुशहाली और मृत्यु के बाद श्रीहरि के चरणों में स्थान मिलता है।

भोजन में रखें सावधानी

इस दिन व्रत रखने वाले लोगों को चावल, गेहूं, दाल और अन्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मांस, मछली, अंडा, शराब और अन्य तामसिक भोजन से भी पूरी तरह दूर रहना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है और भगवान विष्णु अप्रसन्न हो सकते हैं।

तुलसी और व्यवहार का रखें ध्यान

देवशयनी एकादशी पर तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए और न ही तुलसी को जल अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता भी भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। इसके साथ ही गरीब, बुजुर्ग, माता-पिता, साधु-संत और जरूरतमंद लोगों का सम्मान करें। किसी का अपमान करना या कटु व्यवहार करना शुभ नहीं माना जाता।

इन बातों से भी बचें

इस दिन घर में शांति बनाए रखें और किसी से विवाद या झगड़ा न करें। गुस्से से बचें और मन को शांत रखें। काले या गंदे कपड़े पहनने की बजाय साफ और हल्के रंग, खासकर पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। साथ ही व्रत के दिन आलस्य न करें और दिन में सोने से भी बचें।

पारण का रखें विशेष ध्यान

देवशयनी एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि पर ही सही विधि और समय के अनुसार खोलना चाहिए। गलत समय पर पारण करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। वहीं, देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से भी परहेज करने की परंपरा मानी जाती है।

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Author: The Hindi Post