सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा तक रहेगा। इसी दौरान कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस बार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करेंगे।
बन रहा है शुभ योग
इस साल सावन शिवरात्रि पर दो बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन सिद्धि योग और पुनर्वसु नक्षत्र का विशेष मेल रहेगा। सिद्धि योग सुबह से लेकर शाम 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, जबकि पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। धार्मिक मान्यता है कि सिद्धि योग में किए गए शुभ कार्य सफल होते हैं और भगवान शिव की पूजा का विशेष फल मिलता है।
पूजा का सबसे शुभ समय
सावन शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 53 मिनट तक होगा। निशिता मुहूर्त देर रात 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। भक्त ब्रह्म मुहूर्त से ही शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर पूजा शुरू कर सकते हैं।
भद्रा का रहेगा प्रभाव
इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्रा का भी साया रहेगा। भद्रा सुबह 5 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा का प्रभाव शिव पूजा और जलाभिषेक पर नहीं पड़ता। इसलिए भक्त पूरे श्रद्धाभाव से भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।
किन कामों से करें परहेज
भद्रा के दौरान शादी, गृह प्रवेश, नया कारोबार शुरू करना या अन्य मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और व्रत करने पर किसी तरह की रोक नहीं मानी जाती। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करना शुभ माना गया है।
शिव कृपा पाने का अवसर
धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर सच्चे मन से शिव पूजा करने, जलाभिषेक करने और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखने और दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु इस शुभ अवसर पर शिव आराधना कर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।