Iran पर लगातार अमेरिकी हमले, क्या सिर्फ एयर स्ट्राइक या ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी? बंदर अब्बास बना सबसे बड़ा निशाना

ईरान पर अमेरिकी हमले लगातार सातवीं रात भी जारी रहे। होर्मोजगान, बंदर अब्बास, जास्क, बुशहर, यज्द और कई अन्य इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं। अलग-अलग जगहों पर सैन्य ठिकानों, मिसाइल अड्डों और समुद्री सुविधाओं को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

CENTCOM ने क्या कहा?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने संकेत दिए हैं कि उसका अभियान आगे और तेज हो सकता है। बताया गया है कि अब निशाने पर ईरान की सैन्य रसद, निगरानी प्रणाली, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री क्षमताएं हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान की सैन्य सप्लाई लाइन को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

क्या बदल रही है रणनीति?

हमलों का तरीका देखकर कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ हवाई हमला नहीं हो सकता। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका इजराइल में अतिरिक्त हवाई ईंधन भरने वाले विमान भी भेज रहा है। इससे लंबी दूरी तक लगातार सैन्य अभियान चलाने की क्षमता बढ़ सकती है।

ईरान का बड़ा दावा

ईरान के सांसद अमीर हुसैन साबेती ने दावा किया है कि अमेरिका फारस की खाड़ी के रणनीतिक द्वीपों पर संभावित जमीनी अभियान की तैयारी कर रहा है। उनके अनुसार, पुलों, सड़कों और सुरंगों को निशाना बनाने का मकसद ईरानी सेना की आवाजाही रोकना और द्वीपों को मुख्य भूमि से अलग करना है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बंदर अब्बास क्यों अहम है?

बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा सामरिक बंदरगाह माना जाता है। यहीं से सैन्य रसद, हथियार और ईंधन फारस की खाड़ी के कई अहम इलाकों तक पहुंचते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी और समुद्री गतिविधियों में भी इस बंदरगाह की बड़ी भूमिका है। इसलिए यह इलाका लगातार निशाने पर बताया जा रहा है।

पुल और सुरंग बने निशाना

रिपोर्टों के मुताबिक बंदर अब्बास के आसपास कई पुल, सड़कें और सुरंगें हमलों से प्रभावित हुई हैं। इससे प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवाजाही बाधित होने की खबर है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने और हाईवे से दूर रहने की अपील भी की है।

अंदरूनी इलाकों तक पहुंचे हमले

अब हमले केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य ईरान के यज्द क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया, जहां भूमिगत मिसाइल ठिकाने होने की बात कही जाती है। इससे संकेत मिलते हैं कि हमलों का दायरा धीरे-धीरे ईरान के अंदरूनी सैन्य ढांचे तक बढ़ रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

मौजूदा घटनाक्रम से यह साफ है कि क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, अमेरिका की ओर से किसी संभावित जमीनी अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। दूसरी ओर, ईरान भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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Author: The Hindi Post