Australia भारत को देगा यूरेनियम, लेकिन इसकी जरूरत क्यों है? जानिए इस बड़ी डील से देश को क्या मिलेगा फायदा

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। यह सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ बिजली उत्पादन से भी जुड़ा अहम फैसला माना जा रहा है।

यूरेनियम क्या होता है?

यूरेनियम एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी धातु है, जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल परमाणु बिजलीघरों में ईंधन के रूप में होता है। इससे बड़ी मात्रा में बिजली बनाई जाती है। इसके अलावा इसका उपयोग चिकित्सा, वैज्ञानिक शोध और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। भारत को मिलने वाला यूरेनियम केवल असैनिक यानी शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रमों में ही इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत को इसकी जरूरत क्यों?

भारत की बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि देश में यूरेनियम के भंडार मौजूद हैं, लेकिन उनकी मात्रा सीमित है और घरेलू उत्पादन जरूरत के मुताबिक नहीं है। इसलिए भारत लंबे समय से कजाखस्तान, कनाडा, नामीबिया जैसे देशों से यूरेनियम आयात करता रहा है। अब ऑस्ट्रेलिया भी इस सूची में शामिल हो गया है।

यूरेनियम का होगा क्या इस्तेमाल?

भारत इस यूरेनियम का उपयोग अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में करेगा। इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा और कोयले पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाना और देश की ऊर्जा जरूरतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।

ऑस्ट्रेलिया क्यों है खास?

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक रूप से निकाले जा सकने वाले यूरेनियम संसाधनों का करीब 28 से 30 प्रतिशत हिस्सा वहीं मौजूद है। यही वजह है कि भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया एक भरोसेमंद और मजबूत आपूर्तिकर्ता साबित हो सकता है।

समझौते की अहम शर्त

इस समझौते के तहत भारत ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाले यूरेनियम का इस्तेमाल केवल अंतरराष्ट्रीय निगरानी वाले असैनिक परमाणु संयंत्रों में ही करेगा। इस पूरी प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के नियम लागू होंगे। इससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

भारत को क्या मिलेगा फायदा?

इस डील से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी। इससे परमाणु बिजलीघरों में ईंधन की कमी नहीं होगी, बिजली उत्पादन स्थिर रहेगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और ऑस्ट्रेलिया के साथ रणनीतिक संबंध भी और गहरे होंगे।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

अगर परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ता है, तो देश में बिजली की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। उद्योगों को स्थिर बिजली मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। हालांकि बिजली की कीमत कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है, लेकिन यह समझौता भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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Author: The Hindi Post