कुछ महीने पहले तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो को लेकर लगातार सख्त बयान दे रहे थे। वह अमेरिका के नाटो से बाहर होने की बात कर रहे थे और यूरोपीय देशों की रक्षा नीतियों की आलोचना भी कर रहे थे। लेकिन हालिया नाटो बैठक में उनका रुख पहले से काफी बदला हुआ नजर आया।
बैठक में दिया साथ का संदेश
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नाटो नेताओं की बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान ट्रंप ने सहयोगी देशों से कहा, “हम आपके साथ रहना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अमेरिका नाटो सदस्य देशों को हथियारों की सप्लाई जारी रखेगा। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
विवादित मुद्दों से बनाई दूरी
इस बैठक में ट्रंप ने अपने पुराने विवादित मुद्दों को नहीं उठाया। उन्होंने स्पेन के रक्षा खर्च, ईरान के साथ तनाव या ग्रीनलैंड से जुड़े किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं की। हाल के महीनों में यही विषय नाटो के भीतर मतभेद की वजह बने थे। बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि सम्मेलन में “एकजुटता और सहयोग” का माहौल देखने को मिला।
पहले आलोचना, अब समर्थन
ट्रंप पहले कई बार नाटो की उपयोगिता पर सवाल उठा चुके थे। उन्होंने यूरोपीय देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग की थी और अमेरिका के संगठन से बाहर होने की संभावना भी जताई थी। लेकिन इस बार उन्होंने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने का संदेश दिया, जिसे नाटो के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
सामूहिक सुरक्षा पर सहमति
नाटो शिखर सम्मेलन के संयुक्त घोषणा पत्र में सभी सदस्य देशों ने आर्टिकल 5 के तहत सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांत पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसका मतलब है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में बाकी सभी देश उसके समर्थन में खड़े होंगे। ट्रंप ने भी इस साझा संकल्प का समर्थन किया।
रक्षा निवेश और यूक्रेन पर फैसला
बैठक में यूरोपीय सहयोगी देशों और कनाडा ने रक्षा खरीद के लिए 50 अरब डॉलर से अधिक के नए निवेश का ऐलान किया। साथ ही 2026 में यूक्रेन को 70 अरब यूरो की सैन्य सहायता देने का भी फैसला लिया गया। नाटो महासचिव मार्क रुटे ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी समर्थन किया और इसे जरूरी कदम बताया।