Chaturmas शुरू होने से पहले बच गए सिर्फ 3 शादी के मुहूर्त! जानिए कब लग जाएगा चार महीने का ब्रेक

सनातन धर्म में चातुर्मास का समय बेहद पवित्र और आध्यात्मिक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इन चार महीनों में शादी-विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह समय पूजा-पाठ, व्रत, जप, तप, दान और साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

कब से शुरू होगा चातुर्मास?

इस वर्ष चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से होगी। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के यहां विश्राम के लिए जाते हैं। इसके बाद 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान योगनिद्रा से जागते हैं। तभी से सभी शुभ और मांगलिक कार्य दोबारा शुरू होते हैं।

जुलाई में बचे सिर्फ तीन मुहूर्त

अगर इस साल शादी की तैयारी कर रहे हैं, तो अब ज्यादा समय नहीं बचा है। जुलाई में चातुर्मास शुरू होने से पहले केवल 6 जुलाई, 7 जुलाई और 11 जुलाई को ही विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। 1 जुलाई का एक मुहूर्त पहले ही निकल चुका है। इसके बाद करीब चार महीने तक विवाह और अन्य शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा।

चातुर्मास में शादी क्यों नहीं होती?

शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, तब शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक संस्कार टाल दिए जाते हैं। माना जाता है कि भगवान के जागने के बाद किए गए शुभ कार्य अधिक फलदायी होते हैं और उनमें शुभता बनी रहती है।

धार्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक वजह भी

चातुर्मास वर्षा और मौसम परिवर्तन का समय होता है। इस दौरान संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। माना जाता है कि ऋषि-मुनियों ने धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर भी इस परंपरा को अपनाया। इसलिए इन महीनों में बड़े समारोहों से बचने की सलाह दी गई।

साधना का सबसे उत्तम समय

चातुर्मास को आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। इन चार महीनों में पूजा-पाठ, व्रत, दान, जप और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में की गई साधना से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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Author: The Hindi Post