इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो चुकी है। कड़ी सुरक्षा के बीच 4,800 से ज्यादा श्रद्धालुओं का पहला जत्था कश्मीर घाटी पहुंचा। यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी और कुल 57 दिनों की होगी। समुद्र तल से करीब 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा देश के सबसे पवित्र और कठिन तीर्थस्थलों में से एक मानी जाती है।
क्यों खास है अमरनाथ गुफा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी वजह से इस गुफा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा बर्फानी के दर्शन करने और श्रद्धापूर्वक यात्रा पूरी करने से जीवन के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है।
शास्त्रों में क्या है मान्यता?
भृगु संहिता, नीलमत पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में अमरनाथ यात्रा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस यात्रा से काशी के दर्शन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना अधिक पुण्य मिलता है। यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन रास्तों के बावजूद बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
सबसे पहले किसने देखी गुफा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा के सबसे पहले दर्शन महर्षि भृगु को हुए थे। कहा जाता है कि जब महर्षि कश्यप ने कश्मीर घाटी से जल बाहर निकाला, तब महर्षि भृगु हिमालय में तपस्या के लिए स्थान खोज रहे थे। इसी दौरान उन्हें अमरनाथ की पवित्र गुफा दिखाई दी और उन्होंने बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन किए। इसलिए उन्हें पहला दर्शन करने वाला ऋषि माना जाता है।
बूटा मलिक की प्रसिद्ध कथा
लोक मान्यताओं में चरवाहे बूटा मलिक की कहानी भी बेहद प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि करीब 15वीं शताब्दी में एक संत ने उन्हें कोयले से भरा थैला दिया था। जब उन्होंने थैला खोला तो उसमें सोने के सिक्के थे। संत को ढूंढते-ढूंढते बूटा मलिक एक गुफा तक पहुंचे, जहां उन्हें बर्फ का शिवलिंग दिखाई दिया।
यहीं से बढ़ी यात्रा की मान्यता
मान्यता है कि बूटा मलिक द्वारा गुफा मिलने के बाद अमरनाथ यात्रा को व्यापक पहचान मिली और धीरे-धीरे यह देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में शामिल हो गई। आज भी लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इस यात्रा को आस्था, विश्वास और भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक मानते हैं।