राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के कथित गबन मामले में अयोध्या पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। पुलिस ने आठ नामजद लोगों के साथ कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है। मामले में चोरी, गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
इन लोगों के नाम शामिल
एफआईआर में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष, करुणेश और लवकुश मिश्रा के नाम शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
क्यों जोड़ा गया ‘अज्ञात’ आरोपी?
पुलिस कई गंभीर मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज करती है। इसका मकसद जांच का दायरा खुला रखना होता है। अगर बाद में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसे उसी एफआईआर में आरोपी बनाया जा सकता है। इसके लिए अलग से नई एफआईआर दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती।
कानून क्या कहता है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत पुलिस को अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने का अधिकार है। यह प्रावधान उन मामलों में मदद करता है, जहां अपराध तो हुआ है, लेकिन शुरुआत में आरोपियों की पहचान नहीं हो पाती।
किन मामलों में दर्ज होती है ऐसी एफआईआर?
अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर अक्सर चोरी, सड़क दुर्घटना, ऑनलाइन धोखाधड़ी, भीड़ हिंसा और मारपीट जैसे मामलों में दर्ज की जाती है। जब शिकायतकर्ता अपराधी को नहीं पहचानता या उसकी पहचान स्पष्ट नहीं होती, तब पुलिस इस तरह का मामला दर्ज करती है।
जांच में मिलेगी ज्यादा आजादी
एफआईआर में अज्ञात आरोपी जोड़ने से पुलिस को जांच के दौरान नए लोगों को शामिल करने में आसानी होती है। जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और पैसों के लेन-देन की गहराई से पड़ताल कर सकती हैं। इससे साजिश की पूरी कड़ी तक पहुंचना आसान हो जाता है।
क्या बढ़ सकता है आरोपियों का दायरा?
चढ़ावा चोरी मामले में आपराधिक साजिश की धारा भी लगाई गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां इस मामले को केवल आठ लोगों तक सीमित नहीं मान रही हैं। अगर किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसे भी इसी मामले में आरोपी बनाया जा सकता है।
अब सबकी नजर अगली कार्रवाई पर
राम मंदिर से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए जांच एजेंसियां बेहद सावधानी से हर पहलू की जांच कर रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच की आंच कुछ और बड़े चेहरों तक पहुंचेगी और इस कथित साजिश का पूरा सच कब सामने आएगा।