कांग्रेस ने शुक्रवार को कई राज्यों में अपने संगठन में बड़े बदलाव किए। पार्टी ने राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश और संजय दत्त को हरियाणा का नया एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया है। राजेंद्र पाल गौतम ने अविनाश पांडे की जगह ली है, जबकि संजय दत्त को बी.के. हरिप्रसाद की जगह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, हरिप्रसाद को अब कर्नाटक कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
ओडिशा और सेवा दल में भी बदलाव
कांग्रेस ने ओडिशा में भी नेतृत्व परिवर्तन किया है। अजय कुमार लल्लू की जगह लालजी देसाई को राज्य का नया एआईसीसी प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा, बी.वी. श्रीनिवास को कांग्रेस सेवा दल का नया मुख्य संगठक नियुक्त किया गया है। पार्टी ने इन बदलावों को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की है।
कौन हैं राजेंद्र पाल गौतम?
राजेंद्र पाल गौतम पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं। बाद में उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। कांग्रेस ने उन्हें अनुसूचित जाति विभाग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। पिछले कुछ महीनों से वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
2027 चुनाव पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस ने दिसंबर 2023 में अविनाश पांडे को लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था। अब पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नया चेहरा आगे किया है। माना जा रहा है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है।
दलित वोट बैंक साधने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय सवर्ण समुदाय से आते हैं। ऐसे में एक मजबूत दलित चेहरे को प्रभारी बनाकर कांग्रेस सामाजिक संतुलन बनाने और दलित वोट बैंक को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी की रणनीति से जुड़ा फैसला
राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दे को उठाते रहे हैं। “जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का नारा भी कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को इसी राजनीतिक सोच का विस्तार माना जा रहा है। अब देखना होगा कि यह दांव 2027 के चुनाव में कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाता है।