आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में साउथ अफ्रीका से हार के बाद भारतीय टीम बांग्लादेश के खिलाफ मैदान पर उतरी। इस मुकाबले के लिए टीम इंडिया ने प्लेइंग-11 में दो बदलाव किए। तेज गेंदबाज रेणुका सिंह और स्पिनर राधा यादव को टीम में शामिल किया गया, जबकि अरुणधति रेड्डी और प्रेमा रावत को बाहर बैठना पड़ा। यह फैसला टीम के लिए सही साबित हुआ।
तीन मैच तक करना पड़ा इंतजार
रेणुका सिंह को इस टूर्नामेंट के शुरुआती तीन मैचों में खेलने का मौका नहीं मिला था। वह लगातार बाहर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं। आखिरकार जब उन्हें मौका मिला, तो उन्होंने साबित कर दिया कि वह टीम के लिए कितनी अहम खिलाड़ी हैं। उनके प्रदर्शन ने एक बार फिर टीम मैनेजमेंट का भरोसा जीत लिया।
शुरुआत खराब, लेकिन वापसी शानदार
भारत पहले गेंदबाजी कर रहा था और टीम को तेज शुरुआत की जरूरत थी। पारी के दूसरे ओवर में गेंदबाजी करने आईं रेणुका की शुरुआत अच्छी नहीं रही। उन्होंने अपने पहले ओवर में तीन वाइड गेंदें फेंकीं। हालांकि, इससे उनका आत्मविश्वास नहीं टूटा और ओवर की आखिरी गेंद पर उन्होंने बांग्लादेश की ओपनर दिलारा अक्तर को आउट कर भारत को पहली सफलता दिला दी।
टीम के लिए बनीं इम्पैक्ट प्लेयर
आईपीएल में भले ही ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ का नियम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा कोई नियम नहीं है। इसके बावजूद कुछ खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से मैच का रुख बदल देते हैं। बांग्लादेश के खिलाफ रेणुका सिंह ने यही भूमिका निभाई। उन्होंने सिर्फ छह गेंदों में विकेट लेकर भारतीय टीम को शानदार शुरुआत दिलाई और मैच का माहौल बदल दिया।
खराब फॉर्म से जूझ रही थीं रेणुका
पिछले कुछ समय से रेणुका सिंह अपनी लय में नहीं थीं, जिसके कारण उन्हें प्लेइंग-11 से बाहर होना पड़ा था। उनकी जगह जिन तेज गेंदबाजों को मौका मिला, वे भी कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। ऐसे में रेणुका की वापसी और उनका अच्छा प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए बेहद जरूरी था।
तेज गेंदबाजी को मिली नई उम्मीद
इस टूर्नामेंट में भारतीय स्पिनरों ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन तेज गेंदबाजों को ज्यादा सफलता नहीं मिली थी। पिछले तीन मैचों में टीम इंडिया के 24 विकेटों में से सिर्फ दो विकेट तेज गेंदबाजों के खाते में आए थे। ऐसे में रेणुका सिंह का शुरुआती ओवर में विकेट लेना भारतीय टीम के लिए बड़ी राहत और आगे के मुकाबलों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।