बढ़ती उम्र के साथ कई लोगों को सुबह उठते ही हाथ-पैर और जोड़ों में भारीपन और अकड़न महसूस होती है। कुछ लोगों को बिस्तर से उठकर सामान्य तरीके से चलने-फिरने में 15 से 30 मिनट तक लग जाते हैं। मेडिकल भाषा में इस समस्या को ‘मॉर्निंग स्टिफनेस’ कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ उम्र बढ़ने की निशानी नहीं, बल्कि शरीर में सूजन या जोड़ों की किसी बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
जोड़ों का लुब्रिकेशन कम होना
विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे जोड़ों के बीच एक तरल पदार्थ होता है, जिसे साइनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह जोड़ों को आसानी से चलाने में मदद करता है। रातभर सोने के दौरान शरीर लंबे समय तक स्थिर रहता है, जिससे यह फ्लूइड कम सक्रिय हो जाता है। इसी कारण सुबह उठने पर जोड़ों में अकड़न महसूस होती है। अच्छी बात यह है कि थोड़ा चलने-फिरने और शरीर को सक्रिय करने पर यह परेशानी धीरे-धीरे कम हो जाती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस भी हो सकता है कारण
सुबह की अकड़न कई बार ऑस्टियोआर्थराइटिस का संकेत भी हो सकती है। इस बीमारी में जोड़ों की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है, जिससे दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। आमतौर पर इस स्थिति में सुबह की अकड़न 30 मिनट से कम समय तक रहती है। अगर आपको रोजाना ऐसी समस्या हो रही है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एक घंटे से ज्यादा अकड़न तो रहें सतर्क
अगर सुबह की अकड़न एक घंटे या उससे ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो यह रुमेटाइड आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। इसके अलावा एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं में भी लंबे समय तक अकड़न महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
गलत पोस्चर और विटामिन की कमी
कई बार गलत तरीके से सोना, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहना या शरीर में विटामिन डी3 और कैल्शियम की कमी भी जोड़ों और मांसपेशियों को सख्त बना देती है। इसके कारण सुबह उठने पर शरीर में दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। इसलिए संतुलित आहार और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।
ऐसे पाएं इस समस्या से राहत
अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो किसी रूमेटोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट और एक्स-रे की सलाह दे सकते हैं। राहत के लिए सुबह उठते ही हल्की गर्म सिकाई करें, बिस्तर पर ही स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें और अपनी डाइट में ओमेगा-3, हल्दी और अदरक जैसे एंटी-इन्फ्लेमेटरी खाद्य पदार्थ शामिल करें। छोटी-सी सावधानी आपको बड़ी बीमारी से बचा सकती है।