अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने कहा कि तेहरान अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा और उसे अमेरिका से किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिलेगी।
ईरान की सैन्य क्षमता पर दावा
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट किए। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद ईरान के पास प्रभावी एयर फोर्स, नेवी, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और रडार जैसी महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताएं नहीं बची हैं। उनके मुताबिक संघर्ष ने ईरान की रक्षा व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
डेमोक्रेट्स पर भी साधा निशाना
अपने बयान में ट्रंप ने अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने उन दावों का मजाक उड़ाया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है। ट्रंप ने कहा कि ऐसे तर्क वास्तविक स्थिति से बिल्कुल अलग हैं और जनता को भ्रमित करने वाले हैं।
बातचीत को लेकर क्या बोले?
ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत की पहल अमेरिका ने नहीं बल्कि ईरान ने की थी। उनके अनुसार तेहरान दबाव में आकर वार्ता चाहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी जल्दबाजी में नहीं है और अपनी तय रणनीति के अनुसार आगे बढ़ेगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि ईरान पर दबाव की नीति जारी रहेगी।
वित्तीय राहत से साफ इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि अगले 60 दिनों तक भी अमेरिका अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा। ट्रंप ने दोहराया कि तेहरान को एक सेंट तक नहीं मिलेगा और आर्थिक दबाव बनाए रखा जाएगा।
समझौते की कोशिशें जारी
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के नेताओं ने एक 14-बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य विवादित मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाना है। समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक वार्ता जारी रहने की संभावना है, जबकि क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कुछ अहम कदमों पर भी चर्चा हो रही है।