भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने 3 से 5 साल की अवधि वाले FCNR(B) डिपॉजिट पर ब्याज दर की सीमा को अस्थायी रूप से हटा दिया है। यह छूट 30 सितंबर तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य विदेशी निवेश को बढ़ावा देना और बैंकिंग सिस्टम में डॉलर फ्लो को मजबूत करना है।
FCNR और NRE डिपॉजिट पर राहत
FCNR(B) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट डिपॉजिट विदेशी भारतीयों के लिए होता है, जिसमें वे अपनी कमाई को विदेशी मुद्रा में भारत में रख सकते हैं। RBI ने 3 साल या उससे अधिक अवधि वाले NRE डिपॉजिट पर भी ब्याज सीमा हटाई है। इसमें मैच्योरिटी के बाद रिन्यू किए गए डिपॉजिट भी शामिल हैं। हालांकि शर्त यह है कि ब्याज दरें घरेलू टर्म डिपॉजिट से ज्यादा नहीं हो सकतीं।
बैंकिंग सिस्टम को मिलेगा फायदा
इस फैसले से बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने में आसानी होगी। अब बैंक ज्यादा प्रतिस्पर्धी ब्याज दर ऑफर कर सकेंगे, जिससे एनआरआई निवेश आकर्षित होगा। यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में भी मदद करेगा। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश के रूप में भी इसे देखा जा रहा है।
पहले भी लिए गए थे ऐसे कदम
इस महीने की शुरुआत में भी RBI ने कई उपाय किए थे ताकि विदेशी पूंजी भारत में आकर्षित हो सके। रुपये की गिरती कीमत को देखते हुए यह कदम उठाए गए थे। बैंकों को FCNR डिपॉजिट पर फॉरेक्स स्वैप सुविधा भी दी गई है, जो 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसका लाभ कमर्शियल, को-ऑपरेटिव और स्मॉल फाइनेंस बैंकों तक मिलेगा।