लंबी बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते पर सहमत हो गए हैं। यह समझौता 19 जून को जिनेवा में पाकिस्तान की मध्यस्थता में साइन किया जाएगा। इस घोषणा के बाद दुनिया भर में शांति की उम्मीद बढ़ गई है। कई खाड़ी देशों और वैश्विक नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया है। इसे मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इजराइल की चुप्पी और नेतन्याहू का पोस्ट
इस पूरे घटनाक्रम पर इजराइल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके 80वें जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट किया, लेकिन सीजफायर या ईरान समझौते पर कुछ नहीं कहा। उनकी यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
इजराइली नेताओं की तीखी आलोचना
इजराइल सरकार के कई नेताओं ने इस समझौते की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह डील इजराइल और उसके सुरक्षा हितों के लिए ठीक नहीं है। कुछ नेताओं ने इसे पूरी तरह से खतरनाक बताया है। नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर ने कहा कि इजराइल इस समझौते का हिस्सा नहीं है और यह देश की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। उन्होंने हिजबुल्लाह के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखने की बात भी कही।
सैन्य तनाव और बढ़ता विवाद
समझौते की खबरों के बाद इजराइल में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों को हटाने पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पहले इन विमानों की मौजूदगी को लेकर फ्लाइट संचालन पर असर की चेतावनी दी गई थी। वहीं ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने इन्हें हटाने की बात कही है। दूसरी ओर, नेतन्याहू सरकार के कुछ सदस्य इस डील से सहमत नहीं हैं और इसे खारिज कर रहे हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और स्थिति जटिल बनी हुई है।