फुटबॉल वर्ल्ड कप में इस बार सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि मैच में इस्तेमाल हो रही खास गेंद भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस स्मार्ट फुटबॉल का नाम “ट्रायॉन्डा” है। इसका डिजाइन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी को दर्शाता है, इसलिए इसमें लाल, हरे और नीले रंग की लहरें दिखाई देती हैं। यह पारंपरिक फुटबॉल से बिल्कुल अलग है। जहां पहले गेंद कई टुकड़ों को सिलकर बनाई जाती थी, वहीं ट्रायॉन्डा सिर्फ चार बड़े पैनलों से बनी है, जिन्हें गर्म तकनीक से जोड़ा गया है। इससे गेंद की सतह ज्यादा चिकनी और संतुलित बनती है।
अंदर छिपी है स्मार्ट सेंसर चिप
इस गेंद की सबसे खास बात इसके अंदर लगी स्मार्ट सेंसर चिप है। यह कोई साधारण चिप नहीं, बल्कि एक तरह का छोटा कंप्यूटर है जो हर सेकंड 500 बार गेंद की गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। गेंद कितनी तेज जा रही है, किस दिशा में घूम रही है, कितना स्पिन ले रही है और कब किसी खिलाड़ी ने उसे छुआ, यह सारी जानकारी तुरंत रिकॉर्ड होती रहती है। इस तकनीक की वजह से गेंद की हर छोटी-बड़ी हरकत पर नजर रखी जा सकती है। यही कारण है कि इसे अब तक की सबसे एडवांस फुटबॉल माना जा रहा है।
VAR को मिलती है लाइव जानकारी
गेंद के अंदर मौजूद सेंसर का डेटा सीधे VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) रूम तक पहुंचता है। स्टेडियम में लगे कई एंटेना इस सिग्नल को पकड़कर तुरंत रेफरी सिस्टम तक भेजते हैं। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस डेटा का विश्लेषण करती है। इससे ऑफसाइड, हैंडबॉल, फाउल और गोल लाइन जैसे फैसले पहले से कहीं ज्यादा तेजी और सटीकता से लिए जा सकते हैं। अब रेफरी को सिर्फ कैमरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, क्योंकि गेंद खुद बता देती है कि उसे कब और कैसे छुआ गया।
खिलाड़ियों की हर मूवमेंट पर नजर
सिर्फ गेंद ही नहीं, खिलाड़ियों की गतिविधियों को भी हाईटेक कैमरों से ट्रैक किया जाता है। स्टेडियम में लगे 12 विशेष कैमरे हर खिलाड़ी के शरीर के 29 अलग-अलग हिस्सों को हर सेकंड 50 बार रिकॉर्ड करते हैं। AI इन जानकारियों को गेंद के डेटा के साथ जोड़कर तुरंत पहचान लेती है कि गेंद को किस खिलाड़ी ने छुआ और वह किस स्थिति में था। इस पूरी तकनीक को चलाने के लिए गेंद के अंदर बैटरी भी लगी होती है, जिसे मैच से पहले चार्ज किया जाता है। यही वजह है कि इस वर्ल्ड कप में तकनीक और खेल का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।