शरीर में पानी की कमी नुकसानदायक होती है, लेकिन कुछ अंगों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होना भी खतरनाक साबित हो सकता है। कई लोग पेट का अचानक फूलना या भारीपन महसूस होने को सामान्य समस्या समझ लेते हैं, जबकि यह पेट में तरल पदार्थ जमा होने का संकेत हो सकता है। मेडिकल भाषा में इसे एसाइटिस (Ascites) कहा जाता है। इस स्थिति में पेट असामान्य रूप से बड़ा दिखाई देने लगता है और व्यक्ति को चलने-फिरने या सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है। समय रहते इसकी पहचान बेहद जरूरी है।
लिवर की बीमारी बनती है बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार पेट में पानी भरने की समस्या सबसे ज्यादा लिवर सिरोसिस के मरीजों में देखी जाती है। जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता, तो शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण पेट के अंदर तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसके अलावा तेजी से वजन बढ़ना, टखनों में सूजन, पेट दर्द, थकान और सांस फूलने जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। लंबे समय तक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज न कराना और लिवर की सेहत को नजरअंदाज करना इस जोखिम को बढ़ा सकता है।
हार्ट के आसपास पानी कितना खतरनाक?
दिल के आसपास पानी जमा होने की स्थिति को पेरिकार्डियल इफ्यूजन (Pericardial Effusion) कहा जाता है। इसमें दिल को घेरे रहने वाली परत में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा हो जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकता है। मरीज को सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना और कमजोरी महसूस हो सकती है। अगर पानी की मात्रा ज्यादा बढ़ जाए तो दिल पर दबाव पड़ने लगता है, जो जानलेवा भी साबित हो सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि यदि पेट तेजी से बढ़ रहा हो, अचानक वजन बढ़ रहा हो, पैरों में सूजन आ रही हो, सांस लेने में परेशानी हो रही हो या सीने में लगातार दर्द बना हुआ हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य समझकर टाल देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो सकती है। सही समय पर जांच और इलाज से पेट या दिल के आसपास पानी जमा होने जैसी खतरनाक स्थितियों को नियंत्रित किया जा सकता है और बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।