Vastu Tips: घर बनाने से पहले जरूर जांच लें जमीन, वास्तु की यह एक गलती बना सकती है जीवनभर की परेशानी

हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर हो, जहां वह और उसका परिवार सुख-शांति से रह सके. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार केवल घर बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि जिस जमीन पर घर बनाया जा रहा है, उसका सही होना भी बेहद जरूरी है. माना जाता है कि गलत भूमि पर बना घर भविष्य में कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकता है. इसलिए घर निर्माण से पहले जमीन की प्रकृति और आकार की जांच करना जरूरी बताया गया है.

अधम भूमि क्यों मानी जाती अशुभ?

वास्तु शास्त्र में अधम भूमि को घर बनाने के लिए अच्छा नहीं माना गया है. इसकी पहचान करने के लिए जमीन के उत्तर दिशा वाले हिस्से में करीब एक से डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है. इसके बाद निकाली गई मिट्टी को उसी गड्ढे में दोबारा भरा जाता है. अगर मिट्टी बच जाए तो भूमि शुभ मानी जाती है, लेकिन यदि गड्ढा पूरी तरह भरने के लिए मिट्टी कम पड़ जाए तो उसे अधम भूमि कहा जाता है. मान्यता है कि ऐसी जमीन पर घर बनाने से सुख-समृद्धि में बाधाएं आ सकती हैं.

सिंहमुखी जमीन से बढ़ सकती परेशानी

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, जिस जमीन का आगे का हिस्सा चौड़ा और पीछे का हिस्सा संकरा होता है, उसे सिंहमुखी भूमि कहा जाता है. ऐसी जमीन को घर निर्माण के लिए अशुभ माना गया है. मान्यता है कि इस प्रकार की भूमि पर बने घर में रहने वाले लोगों को मानसिक तनाव, अस्थिरता और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए घर बनाने से पहले जमीन के आकार पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है.

कौन-सी जमीन मानी जाती शुभ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार श्मशान घाट, वीरान स्थान या खंडहर के आसपास घर बनाना भी उचित नहीं माना जाता. ऐसी जगहों पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक माना जाता है. वहीं जिस जमीन का अगला हिस्सा संकरा और पिछला हिस्सा चौड़ा हो, उसे गौमुखी भूमि कहा जाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यह भूमि घर निर्माण के लिए शुभ मानी जाती है और सुख, शांति तथा समृद्धि का प्रतीक समझी जाती है.

The Hindi Post
Author: The Hindi Post