NPT से बाहर निकलने का संकेत, रूस-चीन का साथ और बढ़ती ताकत, क्या ईरान परमाणु बम के बेहद करीब?

ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की संभावना जताकर दुनिया को बड़ा संदेश दिया है। माना जा रहा है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बाहरी निगरानी कम करना चाहता है। इस कदम ने अमेरिका और इजराइल की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसे परमाणु हथियारों की दिशा में संभावित तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

परमाणु क्षमता के करीब ईरान

कई रिपोर्टों के अनुसार ईरान पहले से कहीं ज्यादा परमाणु क्षमता के करीब पहुंच चुका है। उसका दावा है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन पश्चिमी देशों को आशंका है कि जरूरत पड़ने पर वह कम समय में हथियार-ग्रेड सामग्री तैयार कर सकता है। यही वजह है कि उसका परमाणु कार्यक्रम लगातार वैश्विक बहस का विषय बना हुआ है।

मोहसिन रिजाई की चेतावनी

ईरान के वरिष्ठ नेता से जुड़े सैन्य सलाहकार मोहसिन रिजाई ने कहा है कि यदि अमेरिका फारस की खाड़ी या होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ कदम उठाता है तो उसे जवाब मिलेगा। उनके बयान को केवल सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिला है कि ईरान अपने विकल्प खुले रखना चाहता है।

यूरेनियम भंडार से बढ़ी चिंता

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के पास बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस यूरेनियम को और अधिक शुद्ध किया जाए तो इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। इसी वजह से अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी देशों की निगाहें लगातार ईरान की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

रूस और चीन का समर्थन

रूस और चीन को ईरान के महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना जाता है। रूस लंबे समय से उसके परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में सहयोग करता रहा है, जबकि चीन तकनीकी और आर्थिक स्तर पर समर्थन देता है। माना जाता है कि इन दोनों देशों का साथ ईरान की स्थिति को मजबूत बनाता है और पश्चिमी दबाव का सामना करने में मदद करता है।

सिर्फ हमले समाधान नहीं

ईरान का परमाणु कार्यक्रम दशकों पुराना है और इसे रोकने के लिए प्रतिबंधों, सैन्य कार्रवाई और साइबर हमलों का सहारा लिया गया। इसके बावजूद ईरान ने अपनी तकनीकी क्षमता विकसित की है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी देश के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन उसके वैज्ञानिक ज्ञान और महत्वाकांक्षा को पूरी तरह खत्म करना बेहद मुश्किल होता है। यही कारण है कि ईरान का परमाणु मुद्दा आज भी दुनिया की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौतियों में शामिल है।

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Author: The Hindi Post