ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है अहमद वाहिदी । अहमद वाहिदी इस समय ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख हैं। उन्होंने यह जिम्मेदारी उस समय संभाली जब फरवरी 2026 में अमेरिकी और इजरायली हमलों में पूर्व कमांडर मोहम्मद पकपोर की मौत हो गई। इसके बाद से वाहिदी ईरान की सैन्य रणनीति और सुरक्षा फैसलों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अमेरिका और इंटरपोल की नजर में
अहमद वाहिदी लंबे समय से अमेरिका और इंटरपोल की निगरानी में हैं। अमेरिका ने उन पर कई प्रतिबंध लगाए हैं और आरोप लगाया है कि उन्होंने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाई थी। वहीं इंटरपोल उन्हें 1994 में ब्यूनस आयर्स में हुए यहूदी कम्युनिटी सेंटर बम धमाके के मामले में तलाश रहा है। इस हमले में 85 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाहिदी का नाम लगातार विवादों में बना हुआ है।
अमेरिका से समझौते के खिलाफ रुख
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहिदी ईरान के सबसे सख्त और कट्टर नेताओं में गिने जाते हैं। माना जाता है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी नरम समझौते के पक्ष में नहीं हैं। हाल के तनाव के दौरान उन्होंने साफ कहा कि यदि ईरान पर फिर हमला हुआ तो जवाब भी बेहद कड़ा होगा। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ाने के कदम को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया तय करने में वाहिदी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
रक्षा मंत्री से IRGC प्रमुख तक
1958 में ईरान के शिराज शहर में जन्मे अहमद वाहिदी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वह ईरानी सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े। वह IRGC की विशेष इकाई कुद्स फोर्स के पहले कमांडर भी रह चुके हैं। इसके अलावा रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और कई अहम सरकारी पदों पर भी काम कर चुके हैं। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों को लेकर भी अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे। आज वाहिदी को ईरान की सैन्य और राजनीतिक रणनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जा रहा है।