सनातन धर्म में अष्टमी तिथि को मां दुर्गा की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस बार यह अष्टमी अधिकमास में पड़ रही है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। भक्तों के लिए यह दिन मां जगदंबा की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर माना जा रहा है।
कब है अधिकमास दुर्गा अष्टमी?
दृक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 23 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 24 मई को सुबह 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर दुर्गा अष्टमी का व्रत और पूजा 23 मई, शनिवार को की जाएगी। धार्मिक दृष्टि से यह दिन देवी आराधना, व्रत और शुभ कार्यों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
जानें शुभ मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी के दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:23 बजे से 5:08 बजे तक रहेगा, जो पूजा और ध्यान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम 6:39 बजे से 7:01 बजे तक और अमृत काल रात 11:45 बजे से अगले दिन 1:21 बजे तक रहेगा। इन शुभ समयों में पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।
ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा
दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को लाल फूल, लाल चुनरी और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। पूजा के दौरान दुर्गा व्रत कथा का पाठ करें और मां के मंत्रों का जाप करें। अंत में विधिवत आरती कर प्रसाद वितरित करें। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से मां दुर्गा प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और घर में सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं।