क्या रोज खाए जाने वाले बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक्स और रेडी टू ईट फूड सच में सुरक्षित हैं? एक नई रिपोर्ट ने पैक्ड फूड इंडस्ट्री को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नैटफर्स्ट और उसके कंज्यूमर न्यूट्रिशन प्लेटफॉर्म ट्रुथइन की स्टडी में खुलासा हुआ है कि भारत में बिकने वाले 80% से ज्यादा पैक्ड फूड्स में आर्टिफिशियल फ्लेवर, रंग और जरूरत से ज्यादा चीनी मौजूद है। इस रिसर्च में एआई तकनीक की मदद से 25 से ज्यादा कैटेगरी के करीब 23 हजार फूड प्रोडक्ट्स के लेबल का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले बताए जा रहे हैं।
बिस्कुट और ड्रिंक्स में खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक 80% से ज्यादा बिस्कुटों में आर्टिफिशियल फ्लेवर्स और सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं लगभग 98% कोल्ड ड्रिंक्स में ऐसे एडिटिव्स पाए गए हैं, जिन्हें सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है। रेडी टू ईट फूड की हालत भी बेहतर नहीं है। करीब 96% तैयार खाने वाले पैक्ड फूड में आर्टिफिशियल तत्व मिले हैं और 90% में नमक की मात्रा तय सीमा से काफी ज्यादा पाई गई। मीठी चॉकलेट्स और डेजर्ट्स में भी भारी मात्रा में चीनी और फैट पाया गया है।
बच्चों की सेहत पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फूड्स का लगातार सेवन बच्चों और युवाओं की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है। सुबह के नाश्ते में खाए जाने वाले मीठे सीरियल्स में भी 60 से 70 प्रतिशत तक आर्टिफिशियल एडिटिव्स पाए गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले पैक्ड फूड मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि छोटे बच्चे इन्हीं चीजों को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं।
लेबल पढ़ने में लापरवाही
डॉक्टरों के अनुसार लगभग हर तरह के पैक्ड फूड में एक जैसा खतरनाक पैटर्न देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट में राष्ट्रीय पोषण संस्थान की स्टडी का हवाला देते हुए बताया गया कि 75% से ज्यादा लोग दावा तो करते हैं कि वे फूड पैकेट का लेबल पढ़ते हैं, लेकिन केवल 14% लोग ही सामग्री की पूरी सूची ध्यान से देखते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां इसी लापरवाही का फायदा उठाकर स्वाद बढ़ाने और सामान को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए जरूरत से ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल कर रही हैं।