एल नीन्यो एक मौसमीय बदलाव है, जो हर 2 से 7 साल में प्रशांत महासागर में होता है। सामान्य दिनों में दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र का पानी ठंडा रहता है और एशिया की तरफ़ गर्म पानी जमा रहता है। हवाएं इस गर्म पानी को एशिया की तरफ धकेलती रहती हैं। लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, तब गर्म पानी वापस दक्षिण अमेरिका की ओर फैलने लगता है। इसी स्थिति को एल नीन्यो कहा जाता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है।
भारत में क्यों बढ़ती है गर्मी?
एल नीन्यो के दौरान मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है। भारत में मॉनसून लाने वाली हवाएं कमजोर हो जाती हैं। इससे बादल कम बनते हैं और बारिश घट जाती है। आसमान साफ रहने से सूरज की तेज़ किरणें सीधे ज़मीन पर पड़ती हैं। यही वजह है कि अप्रैल से जून तक उत्तर भारत, राजस्थान, दिल्ली, यूपी और मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ जाता है। कई जगहों पर हीटवेव लंबे समय तक चलती है।
सुपर एल नीन्यो क्या है?
जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे सुपर एल नीन्यो कहा जाता है। अभी समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई हिस्सों में यह पहले ही करीब 0.9 डिग्री ऊपर पहुंच चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह बढ़ोतरी जारी रही, तो इस साल सुपर एल नीन्यो बन सकता है। ऐसा बहुत कम बार हुआ है और हर बार दुनिया ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी देखी है।
पहले भी दिख चुका असर
इतिहास में 1982, 1997 और 2015 में सुपर एल नीन्यो आया था। उन वर्षों में दुनिया के कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और कमजोर मॉनसून देखने को मिला था। भारत में भी तापमान कई शहरों में 45 से 48 डिग्री तक पहुंच गया था। बारिश कम हुई थी और गर्मी लंबे समय तक बनी रही थी। मौसम वैज्ञानिकों को डर है कि इस बार असर उससे भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ा रही खतरा
धरती पहले ही ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से लगातार गर्म हो रही है। ऐसे में अगर सुपर एल नीन्यो आता है, तो उसका असर कई गुना ज्यादा महसूस हो सकता है। समुद्र के अंदर बहुत ज्यादा गर्म पानी जमा हो चुका है, जो ऊपर आकर हवा को और गर्म बना रहा है। इससे हीटवेव ज्यादा लंबी और खतरनाक हो सकती है। वैज्ञानिक इसे आने वाले महीनों के लिए बड़ा चेतावनी संकेत मान रहे हैं।
किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। राजस्थान, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भीषण गर्मी पड़ सकती है। मॉनसून कमजोर होने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। अगर सुपर एल नीन्यो पूरी ताकत से सक्रिय हुआ, तो 2026 की गर्मी पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ सकती है।