यशस्वी जायसवाल को लेकर एक बार फिर चयनकर्ताओं के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। भारत-अफगानिस्तान सीरीज के लिए घोषित वनडे और टेस्ट टीम में उन्हें टेस्ट स्क्वॉड में तो जगह मिली, लेकिन वनडे टीम से बाहर कर दिया गया। इस फैसले ने फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स दोनों को चौंका दिया है। पिछले कुछ समय से जायसवाल को टीम इंडिया का भविष्य माना जा रहा था, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि उन्हें धीरे-धीरे सिर्फ टेस्ट क्रिकेट तक सीमित किया जा रहा है।
वनडे में मौका नहीं मिला पूरा
जायसवाल पिछले करीब तीन साल से टीम इंडिया का हिस्सा हैं। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने अपनी मजबूत जगह बना ली है, लेकिन वनडे और टी20 में उन्हें लगातार मौके नहीं मिले। टी20 टीम से वह पहले ही बाहर चल रहे हैं और अब वनडे टीम से भी उनका नाम गायब हो गया। खास बात यह है कि पिछली वनडे सीरीज में वह टीम का हिस्सा थे, भले ही उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला था। वहीं भारत राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने अपना पहला वनडे शतक भी लगाया था। इसके बावजूद उन्हें बाहर करना कई लोगों को समझ नहीं आ रहा।
बैकअप ओपनर की उम्मीद टूटी
क्रिकेट फैंस को उम्मीद थी कि जायसवाल को कम से कम बैकअप ओपनर के तौर पर टीम में रखा जाएगा। खासकर रोहित शर्मा की फिटनेस को देखते हुए माना जा रहा था कि उन्हें मौके मिल सकते हैं। अगले साल होने वाले वर्ल्ड कप की तैयारी को ध्यान में रखते हुए भी जायसवाल को भविष्य के विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन चयनकर्ताओं ने अलग रास्ता चुना और उन्हें पूरी तरह बाहर कर दिया। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या टीम मैनेजमेंट उनकी भूमिका को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
उप-कप्तानी पर भी उठे सवाल
टेस्ट टीम में भी चयनकर्ताओं के फैसले ने चर्चा बढ़ा दी है। ऋषभ पंत को उप-कप्तानी से हटाकर केएल राहुल को यह जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में माना जा रहा था कि युवा खिलाड़ी होने के नाते जायसवाल को भविष्य के कप्तान के तौर पर तैयार किया जा सकता था। अगर उन्हें उप-कप्तान बनाया जाता तो उन्हें नेतृत्व का अनुभव मिलता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट उन्हें अभी बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं मानते या फिर इसके पीछे कोई और वजह है।