वट सावित्री व्रत इस साल 16 मई, शनिवार को रखा जाएगा। इस बार व्रत का महत्व इसलिए भी ज्यादा माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन शनि जयंती भी पड़ रही है। सुहागिन महिलाएं यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देता है।
व्रत में क्या खाना सही
व्रत के दौरान खान-पान का खास ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। इस दिन तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। महिलाएं फल, दूध और सूखे मेवों का सेवन कर सकती हैं ताकि शरीर में कमजोरी न आए। पूजा के बाद भीगे हुए चनों का प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। गर्मी का मौसम होने की वजह से पानी पीते रहना और हल्का सात्विक भोजन करना बेहतर रहता है।
इन चीजों से करें परहेज
व्रत के दिन ज्यादा तला-भुना और भारी भोजन खाने से बचना चाहिए। ऐसा भोजन शरीर में आलस्य और असहजता बढ़ा सकता है। पूजा वाले दिन साफ और शुद्ध भोजन को ही प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए। मान्यता है कि सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और पूजा का पूरा फल मिलता है।
इन मंत्रों का करें जाप
पूजा के दौरान मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है। बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं “ॐ सती सावित्र्यै नमः” और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकती हैं। अखंड सौभाग्य के लिए “ॐ सौभाग्य प्रदायिन्यै नमः” मंत्र भी बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन मंत्रों के जाप से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
सावित्री-सत्यवान की कथा
सावित्री और सत्यवान की कथा इस व्रत का सबसे बड़ा आधार मानी जाती है। कहा जाता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाने के लिए यमराज तक से संघर्ष किया था। यही वजह है कि यह व्रत प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
लाल-पीला रंग सबसे शुभ
वट सावित्री व्रत में लाल और पीले रंग के कपड़े पहनना बेहद शुभ माना जाता है। लाल रंग सुहाग, प्रेम और शक्ति का प्रतीक है, जबकि पीला रंग सुख-समृद्धि और शांति से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में पहने गए रंगों का असर मन और सकारात्मक ऊर्जा पर भी पड़ता है।
हरा और गुलाबी भी बेहतर
अगर कोई महिला लाल या पीला रंग नहीं पहनना चाहती, तो हरा और गुलाबी रंग भी अच्छा विकल्प माना जाता है। हरा रंग प्रकृति और रिश्तों में संतुलन का प्रतीक है, जबकि गुलाबी रंग प्रेम और अपनापन बढ़ाने वाला माना जाता है। ये दोनों रंग गर्मियों में आंखों को सुकून भी देते हैं।
इन रंगों से बचें
पूजा के दौरान काले, स्लेटी और गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। ज्योतिष में इन रंगों को उदासी और नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। सफेद साड़ी पहननी हो तो उसके साथ लाल या गुलाबी बॉर्डर या चुनरी जरूर रखें। मान्यता है कि शुभ रंग पहनकर पूजा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।