Bhojshala पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब फिर चर्चा में आई राजा भोज की स्थापित मां वाग्देवी की रहस्यमयी मूर्ति

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार की भोजशाला को मां वाग्देवी यानी सरस्वती मंदिर माना है। कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या केस का भी हवाला दिया और मुस्लिम पक्ष को यहां नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाली मांग खारिज कर दी। हालांकि मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। इस फैसले के बाद भोजशाला और वहां स्थापित मां सरस्वती की मूर्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

क्या है भोजशाला विवाद

भोजशाला मध्य प्रदेश के धार शहर में स्थित है, जो करीब 1000 साल पहले परमार राजवंश की राजधानी था। हिंदू पक्ष का दावा है कि राजा भोज ने यहां मां वाग्देवी का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र बनवाया था। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद और सूफी संत कमालुद्दीन चिश्ती से जुड़ी जगह मानता रहा है। यह परिसर लंबे समय से Archaeological Survey of India यानी ASI के संरक्षण में है।

ASI सर्वे में क्या मिला

2024 में हुए ASI सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि इमारत के कई हिस्से पुराने मंदिर के अवशेषों जैसे दिखाई देते हैं। खंभों पर हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियां, संस्कृत शिलालेख और हवन कुंड जैसे प्रमाण मिले। साथ ही परिसर में फारसी लेख और कमाल मौला दरगाह के संकेत भी मौजूद हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने इसे मंदिर मानने की बात कही।

राजा भोज और वाग्देवी मंदिर

राजा भोज को विद्वान और कला प्रेमी राजा माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने 100 से ज्यादा मंदिर बनवाए और खुद कई किताबें लिखीं। धार में उन्होंने एक बड़ा शिक्षा केंद्र बनवाया था, जिसे बाद में भोजशाला कहा गया। मान्यता है कि यहां मां वाग्देवी यानी सरस्वती की सुंदर मूर्ति स्थापित थी, जहां विद्यार्थी पढ़ाई शुरू करने से पहले पूजा करते थे।

लंदन कैसे पहुंची मूर्ति

सबसे दिलचस्प कहानी मां वाग्देवी की मूर्ति की है। कहा जाता है कि 1875 में ब्रिटिश अधिकारी विलियम किनकेड को धार के पुराने महल के खंडहरों से कई प्राचीन वस्तुएं मिली थीं, जिन्हें इंग्लैंड भेज दिया गया। बाद में प्रसिद्ध पुरातत्वविद विष्णु श्रीधर वाकणकर ने 1961 में लंदन जाकर ब्रिटिश म्यूजियम में उस मूर्ति का अध्ययन किया। उन्होंने राजा भोज की किताब ‘समरांगण सूत्रधार’ से मिलान कर दावा किया कि यही भोजशाला की असली वाग्देवी मूर्ति है।

अब आगे क्या होगा

भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है, लेकिन मां वाग्देवी की मूर्ति को लेकर हिंदू पक्ष लगातार उसे भारत वापस लाने की मांग कर रहा है। कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से ब्रिटिश सरकार के साथ बातचीत तेज करने की बात कही है। कई कोशिशों के बावजूद मूर्ति अब तक भारत नहीं लौट पाई है। लोगों का मानना है कि जिस दिन मां वाग्देवी की मूर्ति दोबारा भोजशाला में स्थापित होगी, वही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा ऐतिहासिक क्षण होगा।

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Author: The Hindi Post