केदारनाथ मंदिर हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित भगवान शिव का बेहद पवित्र धाम माना जाता है. यह 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बर्फीले पहाड़ों के बीच बसे इस धाम को भगवान शिव का दिव्य निवास भी कहा जाता है. केदारनाथ पंचकेदार का सबसे प्रमुख मंदिर माना जाता है. यहां स्थापित शिवलिंग बाकी ज्योतिर्लिंगों से अलग है, क्योंकि इसका आकार गोल नहीं बल्कि त्रिकोण है. यही वजह है कि यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था के साथ-साथ रहस्य का केंद्र भी बना हुआ है.
त्रिकोण शिवलिंग का रहस्य
केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब 12 फीट ऊंचा और 12 फीट चौड़ा बताया जाता है. इसका आकार बैल की पीठ यानी कूबड़ जैसा दिखाई देता है. मान्यता है कि यही कारण है कि यहां का शिवलिंग त्रिभुजाकार है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका सीधा संबंध महाभारत काल और पांडवों से जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि केदारनाथ धाम को केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि पौराणिक रहस्यों का केंद्र भी माना जाता है.
पांडवों से जुड़ी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने ही कुल के लोगों की मृत्यु से दुखी थे. इस पाप से मुक्ति पाने के लिए वे भगवान शिव की शरण में पहुंचे. लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और उनसे मिलने से बचना चाहते थे. इसके लिए महादेव ने बैल का रूप धारण कर लिया और धरती पर छिपने लगे. तभी भीम ने उस बैल को पहचान लिया और उसकी पूंछ पकड़ ली. कहा जाता है कि उसी समय बैल का शरीर भूमि में समाने लगा और उसकी पीठ का हिस्सा केदारनाथ में प्रकट हुआ.
पंचकेदार की मान्यता
मान्यता है कि बैल रूपी भगवान शिव के अलग-अलग अंग उत्तराखंड के अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए. यही पांच स्थान आगे चलकर पंचकेदार कहलाए. इनमें केदारनाथ मंदिर सबसे प्रमुख माना जाता है. यहां मौजूद त्रिकोण शिवलिंग उसी बैल की पीठ का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि केदारनाथ का शिवलिंग बाकी ज्योतिर्लिंगों से अलग और अनोखा दिखाई देता है. इस रहस्यमयी कथा के कारण केदारनाथ धाम की महिमा और भी बढ़ जाती है.