Iran पर मंडरा रहा बड़े युद्ध का खतरा, अमेरिका-इजराइल की संयुक्त तैयारी से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. खबरों के मुताबिक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं. दावा किया जा रहा है कि पेंटागन ने युद्धपोत और हाइटेक बॉम्बर्स को अलर्ट मोड पर रखा है. दूसरी ओर इजराइल भी ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है. माना जा रहा है कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई, तो हालात बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं.

यूरेनियम पर बढ़ा विवाद

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को लेकर समझौता करे. ईरान के कई परमाणु ठिकानों को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिनमें बुशहर, इस्फहान और नतांज प्रमुख हैं. आशंका है कि ईरान इन जगहों से यूरेनियम को किसी सुरक्षित देश में शिफ्ट कर सकता है. माना जा रहा है कि रूस या चीन इस मामले में ईरान की मदद कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया और सख्त हो सकती है.

रूस और चीन पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान यूरेनियम को समुद्री रास्ते से रूस भेजने की कोशिश कर सकता है. वहीं दूसरा विकल्प चीन भी माना जा रहा है. तेल सप्लाई और रणनीतिक साझेदारी के चलते चीन ईरान को समर्थन दे सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो मिडिल ईस्ट की राजनीति और वैश्विक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं. अमेरिका के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

एनर्जी सेक्टर बन सकते हैं निशाना

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि संभावित सैन्य कार्रवाई में Iran के एनर्जी सेक्टर को निशाना बनाया जा सकता है. खर्ग आइलैंड, असालुयेह पेट्रोकेमिकल हब और आबादान रिफाइनरी जैसे बड़े तेल केंद्र संभावित टारगेट बताए जा रहे हैं. इन ठिकानों पर हमला होने की स्थिति में ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है. माना जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल का फोकस ईरान की तेल सप्लाई और आर्थिक ताकत को कमजोर करने पर है.

इजराइल भी पूरी तैयारी में

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद को लेकर भी कई दावे किए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इजराइल ने अमेरिका को संभावित टारगेट्स की जानकारी दी है. साथ ही यह भी दावा है कि ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर तेजी से हमला करने की योजना तैयार की गई है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मिडिल ईस्ट में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं.

वार्ता या युद्ध का फैसला

अब पूरी दुनिया की नजर ईरान के अगले कदम पर टिकी है. अगर बातचीत और समझौते का रास्ता निकलता है, तो तनाव कम हो सकता है. लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं, तो मिडिल ईस्ट में बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू होने का खतरा बढ़ सकता है. अमेरिका और इजराइल दोनों ने संकेत दिए हैं कि वे ज्यादा लंबा इंतजार करने के मूड में नहीं हैं. ऐसे में आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं.

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Author: The Hindi Post