फैटी लिवर आज तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुका है. यह तब होता है जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है. शुरुआत में इसके खास लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए लोग इसे सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने लगती है. लिवर शरीर से गंदे और जहरीले तत्व बाहर निकालने, भोजन पचाने और ऊर्जा संतुलित रखने का काम करता है. जब लिवर सही तरीके से काम नहीं करता, तो इसका असर पूरे शरीर पर दिखने लगता है.
किन अंगों पर पड़ता है असर
डॉक्टरों के अनुसार फैटी लिवर सिर्फ लिवर तक सीमित बीमारी नहीं है. इसका असर हार्ट, किडनी, पैंक्रियाज और शरीर के मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ सकता है. फैटी लिवर वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. शरीर में सूजन बढ़ने से हार्ट और ब्लड वेसल्स प्रभावित हो सकते हैं. कई मामलों में किडनी की कार्यक्षमता भी कमजोर पड़ने लगती है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेल होने का खतरा भी हो सकता है.
बचाव के लिए क्या करें
फैटी लिवर से बचने के लिए सबसे जरूरी है सही लाइफस्टाइल अपनाना. रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज या वॉक जरूर करें. तला-भुना, ज्यादा मीठा, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं. खाने में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करें. वजन कंट्रोल में रखना भी बहुत जरूरी है. इसके अलावा भरपूर पानी पीना, पर्याप्त नींद लेना और देर रात तक जागने से बचना लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है. शराब और धूम्रपान से दूरी बनाना भी बेहद जरूरी माना जाता है.
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से समझ नहीं आते. लगातार थकान रहना, पेट में भारीपन, भूख कम लगना या कमजोरी महसूस होना इसके संकेत हो सकते हैं. इसलिए समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाना फायदेमंद माना जाता है. अगर जांच में फैटी लिवर की समस्या सामने आए, तो इसे हल्के में न लें. सही खानपान, नियमित जांच और बेहतर लाइफस्टाइल अपनाकर इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.