West Asia Conflict पर ईरान का बड़ा बयान, वैश्विक हस्तक्षेप की मांग और अमेरिका-इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने यह बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उनका कहना है कि यह संघर्ष अब केवल एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने सभी देशों से इस संकट को खत्म करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की।

होर्मुज स्ट्रेट और व्यापार पर असर

इलाही ने आरोप लगाया कि युद्धविराम के बावजूद ईरान के समुद्री मार्गों, खासकर होर्मुज स्ट्रेट में बाधाएं पैदा की जा रही हैं। इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। उनका मानना है कि समुद्री रास्तों को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

संघर्ष की शुरुआत पर ईरान का पक्ष

उन्होंने कहा कि ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया, बल्कि उसे इसमें धकेला गया। उनके अनुसार, ईरान ने कई बार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की थी। ओमान और जिनेवा में हुई बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही थी, लेकिन अचानक हुए हमलों ने इस प्रक्रिया को रोक दिया। उनका दावा है कि ईरान हमेशा कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहा है।

अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप

इलाही ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर अचानक हमला किया था, जिसका उद्देश्य सरकार को कमजोर करना था। उन्होंने कहा कि इस हमले में स्कूल, अस्पताल और अन्य नागरिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। उनके अनुसार, इस युद्ध ने हजारों लोगों की जान ली है और भारी मानवीय संकट पैदा किया है।

“न युद्ध न शांति” जैसी स्थिति जारी

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पूरी तरह शांत नहीं है, बल्कि “न युद्ध न शांति” जैसी है। यानी तनाव अभी भी बना हुआ है। ईरान ने बिना शर्त आत्मसमर्पण को स्वीकार नहीं किया और लंबे समय तक मुकाबला किया। बाद में युद्धविराम हुआ, लेकिन हालात अभी भी अस्थिर हैं। उनका कहना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब आक्रामक नीतियां खत्म हों।

ईरान की तैयारियां और वैश्विक अपील

इलाही ने चेतावनी दी कि ईरान किसी भी संभावित स्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीतियों पर भरोसा करना मुश्किल है। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह आगे आए और इस संघर्ष को रोकने में मदद करे। उनका कहना है कि अगर वैश्विक शक्तियां हस्तक्षेप करें, तो न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता भी बहाल हो सकती है।

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Author: The Hindi Post